नथुनी अहीर डेरा के बाद गरहथा कला में भी शिक्षा व्यवस्था शर्मसार! छात्रा से कंधा दबवाने के आरोप प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षक निलंबित, निरीक्षण रिपोर्ट ने खोली स्कूल की पोल !
बक्सर- बिहार के बक्सर से सरकारी विद्यालयों की लगातार सामने आ रही खबरों ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डुमरांव अनुमंडल के नथुनी अहीर डेरा मध्य विद्यालय के बाद अब ब्रह्मपुर प्रखंड के गरहथा कला मध्य विद्यालय से आई खबर ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विद्यालय में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद विभाग ने आनन-फानन में प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षकों को निलंबित कर दिया है! जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है!प्रधानाध्यापक समेत चार निलंबित !
निलंबित शिक्षकों में प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव, विशिष्ट शिक्षक योगेंद्र यादव, शिक्षक राकेश सिंह और शिक्षक रामबचन यादव शामिल हैं। विभागीय कार्रवाई में चारों के खिलाफ अलग-अलग आरोप दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे गंभीर आरोप शिक्षक रामबचन यादव से जुड़ा है, जिन पर एक छात्रा से कंधा दबवाने का आरोप लगाया गया है।
छात्रा से कंधा दबवाने का आरोप
शिक्षक रामबचन यादव पर लगा आरोप ने शिक्षा विभाग को शर्मसार कर दिया है! विभागीय रिपोर्ट में छात्रा से कंधा दबवाने की बात दर्ज है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद होगी, लेकिन सवाल यह है कि जिस विद्यालय में शिक्षक बच्चों को पढ़ाने और सुरक्षित वातावरण देने के लिए तैनात हैं, वहां छात्रा से ऐसी सेवा लेने का आरोप आखिर सामने कैसे आया? यह सिर्फ एक शिक्षक के आचरण का सवाल नहीं है। यह विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षक की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था—तीनों पर सवाल खड़ा करता है।बच्चों ने स्कूल में जड़ा ताला
मामला तब और गंभीर हो गया जब विद्यालय की व्यवस्था से नाराज छात्र-छात्राओं ने स्कूल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। छात्रों की शिकायत थी कि विद्यालय में पढ़ाई ठीक से नहीं हो रही है और कुछ शिक्षक कक्षा संचालन के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। बच्चों का स्कूल में ताला लगाना अपने आप में शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा संकेत है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताब और कॉपी होनी चाहिए, अगर वही बच्चे विद्यालय की व्यवस्था के खिलाफ तालाबंदी करने को मजबूर हों तो सवाल सीधे स्कूल प्रबंधन पर उठता है।जांच में सामने आईं कई गड़बड़ियां
छात्रों की शिकायत के बाद 25 अगस्त को विद्यालय का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में शिक्षण कार्य से लेकर विद्यालय के रिकॉर्ड और बुनियादी सुविधाओं तक कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट में समय-सारणी के पालन, पाठ-टीका, बच्चों को गृहकार्य देने, शिक्षकों के मोबाइल इस्तेमाल और विद्यालय संचालन से संबंधित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। शिक्षक योगेंद्र यादव और राकेश सिंह पर भी शैक्षणिक कार्य में लापरवाही से जुड़े आरोप दर्ज किए गए हैं।
प्रधानाध्यापक भी कार्रवाई से नहीं बच सके
विद्यालय की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव पर भी कार्रवाई हुई है। निरीक्षण में विद्यालय के महत्वपूर्ण अभिलेखों को लेकर आपत्तियां सामने आईं। रोकड़ पंजी, स्टॉक पंजी, मध्याह्न भोजन पंजी और कंपोजिट ग्रांट से संबंधित रिकॉर्ड समेत विद्यालय संचालन के दस्तावेजों के रखरखाव पर सवाल उठे। यही नहीं, निरीक्षण में खेल सामग्री और विद्यार्थियों की कॉपियां शौचालय में रखे होने की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई। यानी स्कूल में जो सामान बच्चों के इस्तेमाल के लिए होना चाहिए था, उसके रखरखाव की स्थिति भी सवालों के घेरे में मिली।
ई-शिक्षाकोष में भी गड़बड़ी का आरोप
मामला सिर्फ कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। निरीक्षण रिपोर्ट में ई-शिक्षाकोष से जुड़ी उपस्थिति पर भी आपत्ति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अनुपस्थित रहने के बावजूद उपस्थिति दर्ज किए जाने और वेतन भुगतान से जुड़ा मामला सामने आया। सवाल है कि जब शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज हो रही है और विभाग के पास डिजिटल निगरानी की व्यवस्था है, तब वास्तविक और दर्ज उपस्थिति में अंतर कैसे रह गया?
मिड-डे मील और शौचालय भी सवालों में
विद्यालय में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था को लेकर भी निरीक्षण में आपत्ति दर्ज की गई। वहीं चार शौचालयों में से केवल दो के क्रियाशील होने की बात सामने आई। यानी बच्चों के लिए जरूरी पढ़ाई, भोजन और बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्कूल के रिकॉर्ड तक—निरीक्षण रिपोर्ट ने कई स्तरों पर सवाल खड़े किए।
25 अगस्त को निरीक्षण, 27 अगस्त को रिपोर्ट
गरहथा कला मध्य विद्यालय का निरीक्षण 25 अगस्त को किया गया और प्रखंड स्तर से रिपोर्ट 27 अगस्त को जिला शिक्षा विभाग को भेजी गई। इसके बाद विभाग ने प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। कार्रवाई हुई, लेकिन अब असली सवाल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है।अगर 25 अगस्त के निरीक्षण में इतनी गड़बड़ियां सामने आ गईं, तो इससे पहले स्कूल की नियमित निगरानी में ये कमियां क्यों नहीं दिखाई दीं? शिक्षकों की कार्यशैली, उपस्थिति, कक्षा संचालन, विद्यालय के रिकॉर्ड, मध्याह्न भोजन और बच्चों की बुनियादी सुविधाओं की निगरानी के लिए विभागीय तंत्र मौजूद है। फिर यह स्थिति बनने तक निगरानी कहां थी?
चार शिक्षक निलंबित, अब निगरानी तंत्र की बारी
गरहथा कला मध्य विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षकों पर कार्रवाई हो चुकी है। छात्रा से कंधा दबवाने का आरोप हो या स्कूल की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था में सामने आई कथित गड़बड़ियां—हर पहलू की निष्पक्ष जांच जरूरी है। लेकिन सवाल सिर्फ चार शिक्षकों के निलंबन से खत्म नहीं होगा। स्कूल में कथित अनियमितताएं चलती रहीं तो निगरानी करने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे? बच्चों को शिकायत के बाद तालाबंदी की नौबत क्यों आई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कार्रवाई सिर्फ स्कूल तक सीमित रहेगी या उस निगरानी तंत्र की भी जवाबदेही तय होगी, जो समय रहते इन कमियों को पकड़ नहीं सका?
गौरतलब है कि नथुनी अहीर डेरा के बाद गरहथा कला की घटना ने एक बार फिर बता दिया है कि सरकारी स्कूलों में सिर्फ आदेश और ऑनलाइन समीक्षा से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जमीन पर निगरानी, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही तय करना ही असली परीक्षा है।




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