नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में बक्सर पुलिस का बड़ा एक्शन! आरोपी दो शिक्षकों के साथ हेडमास्टर पर भी POCSO एक्ट में FIR, गिरफ्तारी से निकली सारी हेकड़ी! जिस हेडमास्टर को 5 सितंबर को राजकीय सम्मान देने की थी तैयारी, पुलिस ने किया गिरफ्तार! दो अन्य आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी—कृष्णाब्रह्म थाने पहुंचे एसपी शुभम आर्य, पुलिसिया कार्रवाई से शिक्षा जगत में मचा हड़कंप?
बक्सर- जिस विद्यालय को बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा का मंदिर होना चाहिए, वहीं नाबालिग छात्रा से जुड़े गंभीर आरोपों ने पूरे बक्सर को झकझोर दिया है। हालांकि शिक्षा विभाग इस मामले में छात्रा का संबंध स्कूल से होने से इनकार कर दिया है! अब बक्सर पुलिस ने ऐसा एक्शन लिया है, जिसने पूरे शिक्षा महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।क्या कहती है बक्सर पुलिस?
कृष्णाब्रह्म थाना के थाना प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में आरोपी दो शिक्षकों के साथ विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो. इमाम अली अंसारी के खिलाफ भी POCSO एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने हेडमास्टर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपी शिक्षकों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।सम्मानित होने वाले हेडमास्टर साहब पहुंचे हवालात!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस हेडमास्टर के विद्यालय में यह पूरा विवाद सामने आया, उसी हेडमास्टर का नाम 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर राजकीय सम्मान के लिए प्रस्तावित सूची में शामिल था। अब गिरफ्तारी के बाद सम्मान की पूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या जिस शिक्षा के मंदिर में महीनों से इस तरह की घिनौनी करतूतें हो रही थीं, उस विद्यालय के एचएम का नाम सम्मानित करने की सूची में प्रस्तावित करने से पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जांच नहीं की? और यदि मामले से विभाग अवगत था, तो आखिर किसके दबाव में इस तरह का निर्णय लिया गया? क्या उस विद्यालय की जांच नहीं की गई? या इस काली करतूत पर अवॉर्ड रूपी सम्मान से पर्दा डालने की तैयारी थी?
सम्मान की सूची से पुलिस की गिरफ्तारी तक!
कल तक जिस नाम को शिक्षक दिवस के मंच पर सम्मानित करने की तैयारी बताई जा रही थी, आज वही नाम पुलिस की FIR और गिरफ्तारी की कार्रवाई के बीच है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का मामला नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां एक ही विद्यालय के दो शिक्षक गंभीर आरोपों में निलंबित होते हैं और उसी दौरान उसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक का नाम राजकीय शिक्षक सम्मान की सूची तक पहुंच जाता है। आखिर सम्मान देने से पहले विभाग ने क्या जांच की? क्या विद्यालय से जुड़ी शिकायतों की जानकारी ली गई? क्या प्रधानाध्यापक की भूमिका को लेकर कोई रिपोर्ट मांगी गई? और अगर जानकारी थी तो सम्मान की प्रक्रिया आगे क्यों बढ़ी?
एक्शन में एसपी शुभम आर्य—पाताल में भी छिपे तो निकालेंगे!
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कप्तान शुभम आर्य खुद कृष्णाब्रह्म थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली और अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की। एसपी के निर्देश के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। हेडमास्टर की गिरफ्तारी के बाद अब फरार बताए जा रहे दो अन्य आरोपी शिक्षकों की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से महकमे में हड़कंप है। संदेश साफ है—बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को कानून की पहुंच से बाहर समझने की भूल भारी पड़ेगी।
दो शिक्षक निलंबित—लेकिन शिक्षा विभाग से बड़ा सवाल
जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण ने बताया कि मामले में दोनों आरोपी शिक्षकों को निलंबित किया गया है और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता। सवाल यह है कि विभागीय कार्रवाई तब क्यों तेज हुई, जब मामला पुलिस और जनता के बीच पहुंच गया? अगर विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, तो इतनी गंभीर शिकायतों के सामने आने से पहले निगरानी व्यवस्था कहां थी? क्या प्रधानाध्यापक की जवाबदेही सिर्फ विद्यालय चलाने तक है या विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है? और सबसे बड़ा सवाल—अगर पुलिस ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ भी FIR दर्ज कर कार्रवाई की है, तो सम्मान चयन की प्रक्रिया में विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
राम की शिक्षा स्थली पर लगा शर्म का दाग!
शिक्षा जगत से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि बक्सर की पहचान भगवान राम की शिक्षा स्थली के रूप में रही है। ऐसे में विद्यालय से जुड़े इस तरह के आरोपों ने लोगों को भीतर तक मर्माहत कर दिया है। लोगों का कहना है कि शिक्षक समाज के लिए आदर्श होते हैं। बच्चे जिनके हाथों में अपना भविष्य सौंपते हैं, अगर उन्हीं पर ऐसे गंभीर आरोप लगें तो यह पूरे समाज के भरोसे को चोट पहुंचाता है। लोगों ने एसपी शुभम आर्य की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप जांच में सत्य साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई हो।
पुलिसिया कार्रवाई ने भरोसा लौटाया, लेकिन शिक्षा विभाग कटघरे में
एक तरफ पुलिस की कार्रवाई ने आम लोगों में भरोसा जगाया है, वहीं दूसरी तरफ पूरा घटनाक्रम शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक हेडमास्टर सम्मान की सूची में था, फिर FIR में नाम आया और गिरफ्तारी हो गई—तो सम्मान चयन की जांच-पड़ताल आखिर किस स्तर पर हुई थी? यह सवाल सिर्फ बक्सर का नहीं है। यह पूरे शिक्षा तंत्र से जुड़ा सवाल है।
शिक्षा मंत्री ने कहा—पूरा बिहार हुआ शर्मसार!
वहीं, इस पूरे प्रकरण को लेकर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी से जब फोन पर बात की गई, तो उन्होंने कहा कि बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले का कैसा सम्मान! जैसे ही घटना की जानकारी हुई, उस राजकीय सम्मान की सूची से हेडमास्टर का नाम अलग कर दिया गया है। इस जघन्य अपराध से केवल बक्सर नहीं, पूरा बिहार शर्मसार हुआ है। ऐसे लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई जरूरी है, लेकिन सवाल पूछने की आजादी उससे भी जरूरी!
ऐसी घटनाओं पर पर्दा डालने की कोशिश किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए। दुर्भाग्य से स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री पर पाबंदी लगाने की कोशिशों की चर्चा भी सामने आती रही है। अगर कहीं पत्रकारों को स्कूल की वास्तविक स्थिति देखने, सवाल पूछने और बच्चों से जुड़े मामलों की पड़ताल करने से रोकने की कोशिश होती है, तो यह व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है। क्योंकि अगर शिक्षा के मंदिर में कुछ गलत हो रहा है तो उसे छिपाने की नहीं, सामने लाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि पुलिस के एक्शन से अपराध के खिलाफ भरोसा जगता है, लेकिन शिक्षा विभाग को भी अब अपने ही सिस्टम की जांच करनी होगी। क्योंकि बेटियों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा! न स्कूल में, न सिस्टम में और न ही सवाल पूछने वाली पत्रकारिता में। फिलहाल पुलिसिया कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।



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