बिजली कटौती से कराह उठा पूरा बक्सर! 1990 का दौर लौटा या 24 घंटे बिजली का दावा सिर्फ कागजों में? 1 घंटे में 24 बार कटौती का दावा—गांव में अंधेरा, AC कमरों में मीटिंग! जनता का तंज—जेनरेटर से साहब रोशन, गरीब के घर का पंखा कौन चलाएगा? पावर प्लांट के बीच बिजली के लिए तरसता बक्सर—आखिर किससे पूछे जनता अपना सवाल?
बक्सर— जिले में बिजली की आंख-मिचौली ने भीषण गर्मी के बीच लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली कटौती को लेकर लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। सरकारी दफ्तरों में AC, बैठकों में VC और PC और जरूरत पड़ने पर जेनरेटर की सुविधा के बीच आम आदमी का सवाल सीधा है—साहब, बिजली की गर्मी जनता सहे और व्यवस्था की ठंडक आप लें, आखिर यह कैसा सिस्टम है?क्या कहते हैं लोग?
जिला मुख्यालय की रहने वाली प्रिया कुमारी ने सुबह बिजली कटौती को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके पिता रात में ही कह रहे थे—“ऐसा हाल तो 1990 के दशक में देखने को मिलता था।” उनका आरोप है कि 24 घंटे बिजली देने के दावे के बावजूद ग्रामीण इलाकों में कई-कई घंटे बिजली गायब रहती है। सवाल यह कि अगर जिले में बिजली व्यवस्था के इतने बड़े-बड़े दावे हैं, तो जमीन पर यह अंधेरा किसका सच है?
एक घंटे में 24 बार बिजली कटने का दावा!
सदर प्रखंड की रहने वाली पीएचडी छात्रा शीला बताती हैं कि वह गांव में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ मैथ से पीएचडी कर रही हैं। उनका कहना है कि 12 अगस्त की शाम 7 बजे से रात 1 बजे तक बिजली कटती रही और गायब रही। शीला का दावा है कि 13 अगस्त की सुबह भी महज एक घंटे के भीतर 24 बार बिजली कट गई। सुबह 7 से 9 बजे तक बिजली नहीं आई और 9 बजे बिजली आने के बाद 9 बजकर 15 मिनट तक कई बार कटौती हुई। शीला का सवाल व्यवस्था के उन जिम्मेदारों से है, जो AC कमरों में बैठकर VC और PC के जरिए व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते हैं—“साहब, आपके कमरे में जेनरेटर चल जाएगा, लेकिन जनता क्या चलाए? घर की महिलाएं बिजली-पानी के अभाव में खाना कैसे बनाएं? दिनभर मजदूरी करने वाला गरीब रात में चैन की नींद कैसे सोए?” और फिर सबसे करारा सवाल—“जब सुविधा दे नहीं सकते तो बिजली बिल और उस पर चक्रवृद्धि ब्याज किस बात का?”बच्चों का होमवर्क भी बिजली का मोहताज!
कार्मेल स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र शिवांश की परेशानी भी इसी व्यवस्था की कहानी कहती है। बच्चा स्कूल से घर लौटता है तो बिजली गुल। शाम को होमवर्क करने बैठता है तो फिर बिजली गुल। मासूम सवाल पूछता है—“क्या बच्चे पूरी रात बिजली आने का इंतजार करके होमवर्क करेंगे?” यह सवाल सिर्फ शिवांश का नहीं, उन तमाम बच्चों का है जिनकी पढ़ाई बिजली की आंख-मिचौली के बीच फंस गई है।VC-PC से बाहर निकलकर जनता का हाल देखिए साहब!
लोगों का कहना है कि जिले में सड़क से लेकर बिजली तक कई सवाल मुंह बाए खड़े हैं। फिर बैठकों और मॉनिटरिंग के नाम पर होने वाली VC-PC का फायदा आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता? लोग व्यंग्य में पूछ रहे हैं—“साहब, बैठक जनता की समस्या हल करने के लिए होती है या AC कमरे में चाय-समोसे के साथ सिस्टम की सफलता गिनने के लिए?”साहब फोन क्यों नहीं उठाते?
जनता की शिकायतों और बिजली कटौती को लेकर विभाग का पक्ष जानने के लिए सप्लाई कार्यपालक अभियंता यानी एक्सक्यूटिव इंजीनियर के सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क किया गया। लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ और न ही कॉल बैक किया गया।ऐसे में विभाग की तरफ से बिजली कटौती की वजह या व्यवस्था पर कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका।डिजिटल मीटर आया, बिजली कहां गई?
डिजिटल मीटर लगाते समय दावा किया गया कि उपभोक्ता रिचार्ज कर बिजली की सुविधा का लाभ उठाएंगे। लेकिन जनता पूछ रही है—रिचार्ज मीटर में है, बिल समय पर है, फिर बिजली कहां है?पावर प्लांट से लैस है हमारा जिला!
विडंबना देखिए—जिस जिले में पावर प्लांट है, उसी जिले के लोग बिजली के लिए तरस रहे हैं। बिजली आती है तो ऐसे चुपके से चली जाती है कि पता लगाने के लिए शायद CBI-CID की संयुक्त जांच टीम की जरूरत पड़े!अब बक्सर की जनता के पांच सीधे सवाल हैं—
पहला— 24 घंटे बिजली का दावा जमीन पर कितने घंटे सच है?
दूसरा— एक घंटे में बार-बार बिजली कटने की शिकायत पर जिम्मेदार कौन है?
तीसरा— AC और जेनरेटर वाले दफ्तरों से बाहर निकलकर अधिकारी जनता की गर्मी कब महसूस करेंगे?
चौथा— बिजली नहीं मिलने के बावजूद बिल और ब्याज की वसूली किस नैतिकता के आधार पर?
और पांचवां— अगर VC-PC और मॉनिटरिंग के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे, तो फिर जनता के करोड़ों रुपये और समय से चल रही ये बैठकें आखिर किस काम की?
बक्सर की जनता जवाब मांग रही है। क्योंकि सवाल सिर्फ बिजली का नहीं है—सवाल उस व्यवस्था का है, जो कागज पर रोशनी और जमीन पर अंधेरा दिखा रही है।








0 Comments