आरओबी नहीं दरकी है 24 लाख लोगों की उम्मीदें!स्कूल खुलने वाले हैं, लेकिन बच्चों के सामने सवाल – रास्ता बंद तो भविष्य कैसे खुलेगा? ‘कोई मरा नहीं न’ से लेकर ‘पुल बनेगा तभी तो गिरेगा’ तक... मंत्री जी के बयान ने जख्म पर छिड़का नमक! डीएम के विशेषाधिकार से सीएम का काफिला गुजर सकता है, तो क्या जनता के लिए नहीं खुल सकता इटाढ़ी रेल फाटक?जब जनता दर्द में है, विधायक जी ‘अली बाबा-40 चोर’ खोजने में और कांग्रेस सड़क पर संघर्ष में व्यस्त!
बक्सर- पांच जून को इटाढ़ी रेलवे गुमटी के पास बना आरओबी क्षतिग्रस्त क्या हुआ, उसके साथ हजारों परिवारों की उम्मीदें भी दरक गईं। यह केवल लोहे, सीमेंट और सरिया का ढांचा नहीं था, बल्कि उन मासूम बच्चों के सपनों का रास्ता था जिनके कंधों पर बस्ता टंगा है, उन मजदूरों की जिंदगी थी जिनके घर का चूल्हा रोज कमाई से जलता है और उन परिवारों का सहारा था जिनकी जिंदगी शहर से जुड़ी हुई है।साहब कैसे जाएंगे बच्चे स्कूल !
स्कूल खुलने का समय नजदीक है और सबसे ज्यादा चिंता अब माता-पिता के चेहरे पर दिखाई देने लगी है। किसी की जुबान पर सवाल है – “बच्चा स्कूल कैसे जाएगा?” तो कोई इस डर में जी रहा है कि कहीं रास्ते की परेशानी बच्चों की पढ़ाई न निगल जाए। इधर मजदूरों की जिंदगी भी पटरी से उतर गई है। रोज शहर जाकर काम करने वाले लोगों के सामने संकट खड़ा है कि अगर शहर तक नहीं पहुंच पाएंगे तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा? बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने तक में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लाचार हैं लोकतंत्र के मालिक!
चुनाव के समय जिस जनता को लोकतंत्र का मालिक कहा जाता है, आज वही मालिक अपने बच्चों की पढ़ाई, अपनी रोजी-रोटी और अपने जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान है। जिन हाथों से वोट लेकर सत्ता की कुर्सियां सजती हैं, उन्हीं हाथों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं दिख रहा। आरओबी बंद है, रेल फाटक बंद है, रास्ते बंद हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों के दरवाजे भी जैसे बंद हो गए हैं।
टूर पर है नेता जी !
सांसद, विधायक और मंत्री अपने दौरों में व्यस्त हैं। जनता पूछ रही है — अगर हमारी जरूरत सिर्फ चुनाव तक थी तो फिर लोकतंत्र का मालिक कौन है?
मंत्री जी का बयान सुन लोगों ने कहा – क्या जनता की तकलीफ की कोई कीमत नहीं?
राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा से जब पत्रकारों ने आरओबी टूटने को लेकर सवाल किया तो उनका जवाब लोगों के गुस्से का कारण बन गया। उन्होंने कहा – “कोई मरा नहीं न।” इस बयान ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया। लोगों का कहना है कि क्या जनता की परेशानी, बच्चों की पढ़ाई, मजदूरों की रोजी-रोटी और लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित होना किसी हादसे से कम है?अब पुल गिरना भी विकास का पैमाना?
बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर से जब पत्रकारों ने पूछा कि करोड़ों की लागत से बनने वाले पुल-पुलिया आखिर क्यों ढह रहे हैं और बक्सर आरओबी का स्लैब 96 घंटे में ही कैसे टूट गया, तो उन्होंने जवाब दिया – “सकारात्मक बात कीजिए, पुल बन रहा है तभी तो गिर रहा है।” मंत्री जी के इस बयान के बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब पुल का गिरना भी विकास की उपलब्धि माना जाएगा?
10 दिन बाद टूटी विधायक की चुप्पी, लेकिन सवालों की संख्या बढ़ गई !
इधर आरओबी के स्लैब टूटने के 10 दिन बाद सदर विधायक आनंद मिश्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि इस भ्रष्टाचार में शामिल “अली बाबा और 40 चोरों” की सूची जारी करूंगा और बताऊंगा कि 10 वर्षों तक विधायक रहे लोगों में बड़ा चोर कौन और छोटा चोर कौन। विधायक के इस बयान के बाद लोग सवाल पूछने लगे कि जब लाखों लोग परेशान हैं, तब समाधान की जगह राजनीतिक पात्रों की तलाश क्यों की जा रही है?अली बाबा इज हियर !
पूर्व माले विधायक अजित कुशवाहा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा – “अली बाबा इज हियर।” इसके बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
बीजेपी की डिजिटल सेना मैदान में, लेकिन जनता के बीच कौन?
इधर सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं के बचाव में बीजेपी की डिजिटल सेना सक्रिय दिखाई दी। बीजेपी जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन ने पूर्व माले विधायक की टोपी पहने तस्वीर साझा कर राजनीतिक जवाब देते हुए लिखा चेहरा जानी पहचानी लगती है! , लेकिन लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित होने पर आखिर कितने नेता उनके बीच पहुंचे? और किस नेता ने कितनी पोस्ट किया!
कांग्रेस सड़क पर, बाकी दलों की चुप्पी पर उठे सवाल!
आरओबी टूटने और रेल फाटक बंद होने से प्रभावित लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में लगातार आंदोलन किया जा रहा है। सड़क से लेकर समाहरणालय और रेलवे स्टेशन परिसर तक कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं बल्कि उन बच्चों, मजदूरों और परिवारों की है जिनकी जिंदगी घरों में कैद हो गई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष का सीधा सवाल !
ईटीवी भारत के वेवसाइट से ली गई फाइल फोटो
उन्होंने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दौरे के दौरान रेल फाटक खुल सकता था, तो क्या आज आम जनता के लिए डीएम साहिबा अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं?
टूटा सिर्फ आरओबी नहीं, व्यवस्था पर भरोसा भी !
आज जनता का सवाल सीधा है — बच्चे परेशान हैं, मजदूर परेशान हैं, मरीज परेशान हैं और आम लोग परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार लोग आखिर कहां हैं? इटाढ़ी में सिर्फ एक पुल नहीं टूटा है। यहां माता-पिता की नींद टूटी है, मजदूरों की उम्मीद टूटी है और सबसे ज्यादा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा टूटा है।









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