96 घंटे में ध्वस्त हुआ 26.40 करोड़ का आरओबी, अब चली कार्रवाई की तलवार तीन अभियंता निलंबित, वेतन से होगी मरम्मत की वसूली; मंत्री के आदेश से विभाग में मची खलबली
बक्सर- इटाढ़ी रेलवे गुमटी के पास करोड़ों रुपये की लागत से बने आरओबी के उद्घाटन के महज चार दिन बाद क्षतिग्रस्त होने के मामले में सरकार ने पहली बड़ी कार्रवाई कर दी है। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र कुमार के निर्देश पर निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े तीन अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पर आने वाला खर्च भी संबंधित अभियंताओं के वेतन से वसूलने का फैसला लिया गया है।उद्घाटन के चार दिन बाद ही खुल गई निर्माण की पोल
31 मई को जनता को समर्पित किए गए इस आरओबी से लोगों को वर्षों पुराने जाम और रेलवे फाटक की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन उद्घाटन के सिर्फ 96 घंटे बाद ही पाया संख्या-5 के समीप स्लैब क्षतिग्रस्त हो गया। करोड़ों की परियोजना के इतनी जल्दी जवाब दे जाने से निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।पहले संवेदक पर केस, अब इंजीनियर भी कार्रवाई
हादसे के बाद पुल निर्माण निगम की ओर से संवेदक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना था कि यदि निर्माण में गड़बड़ी हुई है तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि कार्य की निगरानी करने वाले अभियंता भी जिम्मेदार हैं। बढ़ते जनदबाव और लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब विभाग ने अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।मंत्री के हस्तक्षेप के बाद हुआ बड़ा फैसला
विभागीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पथ निर्माण मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद तीन अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने में आने वाली राशि संबंधित अभियंताओं से वसूली जाएगी। विभागीय स्तर पर इसे एक कड़ा और असामान्य कदम माना जा रहा है।जांच के दायरे में पूरा निर्माण तंत्र
कार्रवाई के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति, निरीक्षण रिपोर्ट और निगरानी प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में और लापरवाही सामने आती है तो अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की तलवार चल सकती है।जनता अब सिर्फ निलंबन नहीं, जवाबदेही चाहती है
आरओबी के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं। आवागमन प्रभावित है और रेलवे फाटक से जुड़ी दिक्कतों का सामना हजारों लोगों को करना पड़ रहा है। तीन अभियंताओं के निलंबन से यह संदेश जरूर गया है कि सरकार मामले को हल्के में नहीं ले रही, लेकिन लोगों के मन में अब भी एक बड़ा सवाल है—क्या कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगी, या फिर 26.40 करोड़ की परियोजना को 96 घंटे में कटघरे में खड़ा करने वाली पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होगी?





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