सेल्फी में विकास, मलबे में छिपा भ्रष्टाचार! 26 करोड़ का आरओबी 96 घंटे में टूटा, अब जिम्मेदार कौन? एफआईआर संवेदक पर, मगर निगरानी करने वाले साहब बेदाग क्यों? उद्घाटन की जल्दी थी या कमीशन की मजबूरी? श्रेय लेने वाले नेताजी गायब, जनता पूछ रही—अब जवाब कौन देगा? बक्सर में विकास का स्लैब टूटा या सिस्टम का चेहरा बेनकाब हुआ?
बक्सर- इटाढ़ी रेलवे गुमटी के समीप 26 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से बना आरओबी उद्घाटन के महज 96 घंटे बाद ही क्षतिग्रस्त हो गया। जिस पुल पर चार दिन पहले तक नेताओं की सेल्फियां, बधाइयों की बाढ़ और विकास के दावे तैर रहे थे, आज उसी पुल का टूटा स्लैब पूरे सिस्टम से सवाल पूछ रहा है। जनता पूछ रही है कि आखिर यह विकास था, गुणवत्ता थी या सिर्फ चुनावी फोटोशूट का मंच? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण में खामी थी तो उद्घाटन किसने कराया? और यदि निर्माण मानकों के अनुरूप था तो फिर चार दिन के भीतर स्लैब टूट कैसे गया?
संवेदक ही दोषी है तो फिर बाकी लोग क्या कर रहे थे?
राज्य पुल निर्माण निगम के कनीय अभियंता द्वारा संवेदक के खिलाफ मुफस्सिल थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि लापरवाही से जान-माल का नुकसान हो सकता था। लेकिन जनता पूछ रही है कि करोड़ों की परियोजना में क्या केवल संवेदक ही अकेला जिम्मेदार होता है? क्या निर्माण की गुणवत्ता जांचने वाले इंजीनियरों की कोई जिम्मेदारी नहीं? क्या कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, निरीक्षण करने वाले अधिकारी और उद्घाटन की अनुमति देने वाले लोग सिर्फ दर्शक थे? अगर काम खराब था तो भुगतान किस आधार पर हुआ? और अगर काम सही था तो पुल टूटा कैसे?लोगों का कहना है कि हर घोटाले में नीचे वाले पर कार्रवाई और ऊपर वालों पर खामोशी आखिर कब तक चलती रहेगी?सांसद का हमला—भ्रष्टाचारियों को जेल भेजो
आरओबी विवाद के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने सत्ताधारी दल और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि इस निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद सत्ताधारी दल की है तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने बिना नाम लिए स्थानीय सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि पत्र लिखने और जांच की मांग करने का नाटक कब तक चलेगा? जनता कार्रवाई देखना चाहती है, बयान नहीं। जिस दिन जिला प्रशासन के अधिकारी सीएम का हेलीकॉप्टर तक हेलीपैड पर नही उतरवा पाए थे कार्रवाई तो उसी दिन इन अधिकारियों पर हो जानी चाहिए थी! लेकिन इस आरओबी के स्लैब टूटने के बाद भाजपा नेताओ को अपने पाप का प्रयाश्चित करना चाहिए ! और यदि कार्रवाई अधिकारियों पर नही होता है ! तो यह मान लिया जाएगा कि इसमें मलाई खाने वाले में वे लोग भी शामिल है!प्रेस रिलीज में रास्ता खुला, जमीन पर फाटक बंद
घटना के बाद जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर दावा किया गया कि रेलवे फाटक खोल दिया गया है और यातायात सामान्य है। लेकिन 48 घंटों बाद तक फाटक बंद रहा और हजारों लोग परेशान होते रहे। दैनिक मजदूर, छात्र, मरीज और छोटे कारोबारी घंटे भटकते रहे। ऐसे में जनता पूछ रही है कि प्रशासनिक रिपोर्ट जमीन पर बनती है या एसी कमरे में?डीएम का बयान और बढ़े सवाल
जिलाधिकारी ने कहा कि पुल का मुख्य स्ट्रक्चर सुरक्षित है और केवल दरार आई है। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूरिंग अवधि पूरी होने से पहले पुल को चालू कर दिया गया था। यहीं से सवालों की नई श्रृंखला शुरू हो गई। यदि क्यूरिंग अवधि पूरी नहीं हुई थी तो उद्घाटन किस आधार पर हुआ? क्या तकनीकी मानकों से ज्यादा जरूरी श्रेय लेना था? क्या जनता को अधूरे निर्माण पर चलने के लिए छोड़ दिया गया था? और क्या जिस पिलड संख्या के पास स्लैब क्षतिग्रस्त हुआ है वह आरओबी के स्ट्रैक्चर में नही आता है?इंजीनियर बोले—बड़े साहब बताएंगे!
श्रेय लेने वालों की भीड़ थी, जवाब देने वाला कोई नहीं
आरओबी के शिलान्यास एवं बनने के बाद फोटो खिंचवाने और श्रेय लेने की होड़ मची हुई थी। सोशल मीडिया विकास के दावों से भरा पड़ा था। लेकिन जैसे ही स्लैब टूटा, वही चेहरे गायब हो गए। किसी का फोन बंद है, कोई शहर से बाहर है और कोई मीटिंग में व्यस्त बताया जा रहा है।आज बक्सर की जनता सिर्फ एक सवाल पूछ रही है—जब पुल बन रहा था तब श्रेय लेने वाले इतने लोग थे, तो अब जवाब देने के लिए कोई सामने क्यों नहीं आ रहा?बक्सर की जनता को अब सिर्फ टूटे स्लैब की चिंता नहीं है। जनता जानना चाहती है कि आखिर 26 करोड़ रुपये की परियोजना में गलती हुई है, लापरवाही हुई है या फिर पूरे सिस्टम ने मिलकर जवाबदेही को मलबे के नीचे दबा दिया है।








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