"गजबे हैं बिहार सरकार के मंत्री जी! बोले- पुल बनेगा तभी तो गिरेगा" उपलब्धियों पर 28 मिनट का भाषण, नाकामियों पर 28 सेकेंड भी नहीं टिक पाए मंत्री संजय टाइगर "वादों की इमारत ऊंची, जवाबों की नींव कमजोर,सवालों की आंधी आई तो बंद हो गया शोर।कामयाबियों का माइक हाथ में खूब सजता है, नाकामियों का आईना दिखते ही चेहरा बदलता है। नता पूछ रही है—साहब, पुल गिर रहा है या जवाबदेही?"
बक्सर- बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर शनिवार को बक्सर पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। जिला अतिथिगृह में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री जी ने मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों का ऐसा लेखा-जोखा पेश किया मानो देश में अब कोई समस्या बची ही न हो। विदेश नीति से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक, ट्रिपल तलाक से लेकर उज्ज्वला योजना और मुफ्त राशन तक उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त गिनाई गई। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पत्रकारों ने उपलब्धियों की तालिका के साथ नाकामियों का हिसाब भी मांग लिया।
"मंत्री जी, उपलब्धियां आपकी हैं तो नाकामियां किसकी हैं?"
पत्रकारों ने सवाल दागा कि देश में बेरोजगारी, पेपर लीक, पुलों के गिरने, बढ़ती महंगाई, किसानों की परेशानियों और सरकारी तंत्र की विफलताओं पर सरकार का क्या कहना है? बिहार में एक के बाद एक पुल गिर रहे हैं। करोड़ों रुपये की परियोजनाएं सवालों के घेरे में हैं। शराबबंदी वाले प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में शराब मिल रही है। बक्सर में तो चोर 132 फीट ऊंचा मोबाइल टावर तक उखाड़ ले गए। ऐसे में सरकार की जवाबदेही क्या है? सवाल सुनते ही मंत्री जी का चेहरा बदल गया। उपलब्धियों के महासागर में गोते लगा रहे मंत्री अचानक जवाबदेही के किनारे पर आकर असहज दिखे।
"पुल बनेगा तभी तो गिरेगा"
इसी दौरान मंत्री जी ने ऐसा जवाब दिया जिसने पूरे प्रेस वार्ता की दिशा बदल दी। उन्होंने कहा—"पुल बन रहा है तभी तो गिर रहा है।" बस फिर क्या था। कमरे में मौजूद लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। सोशल मीडिया की भाषा में कहें तो मंत्री जी का यह बयान कुछ ही सेकेंड में चर्चा का विषय बन गया। लोग पूछने लगे कि क्या अब पुलों का गिरना भी विकास का प्रमाणपत्र माना जाएगा? यदि पुल बनना उपलब्धि है तो क्या उसका गिरना भी उपलब्धि की ही अगली कड़ी है?
लोकल समस्या है, जिलाध्यक्ष जवाब देंगे!
जब पत्रकारों ने मोबाइल टावर चोरी, सरकारी कार्यालयों में शराब मिलने और स्थानीय प्रशासनिक विफलताओं पर सवाल पूछे तो मंत्री जी ने कहा कि यह स्थानीय मुद्दे हैं और इसका जवाब पार्टी के जिलाध्यक्ष देंगे। यानि सरकार की उपलब्धियों का श्रेय मंत्री जी लेंगे, लेकिन नाकामियों का जवाब जिलाध्यक्ष देंगे।
कितने भाषण दिए मंत्री जी जनता नही पूछती है!
यही है जनता का असली सवाल !लोकतंत्र में जनता सरकार से यह नहीं पूछती कि कितने भाषण दिए गए। जनता पूछती है कि सड़क क्यों टूटी? पुल क्यों गिरा? नौकरी कहां है? पेपर क्यों लीक हुआ? कानून का डर क्यों खत्म हो रहा है? बक्सर में मंत्री जी की प्रेस वार्ता भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन कुछ ऐसे सवाल पीछे छोड़ गई ! जो लोगो को सोचने पर मजबूर कर दिया है!
अगर पुल गिरना सामान्य है तो जिम्मेदार कौन है?
अगर टावर चोरी होना लोकल समस्या है तो कानून व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी है?
अगर सब कुछ अच्छा है तो जनता परेशान क्यों है?
और अगर सवाल पूछना नकारात्मकता है, तो लोकतंत्र में जवाबदेही का मतलब क्या है? क्योंकि लोकतंत्र में ताली से सरकार चल तो सकती है! लेकिन जनता के सवालों से ही उसकी परीक्षा होती है। और बक्सर में इस बार सवाल मंत्री जी पर भारी पड़ते दिखे।




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