घूसखोरी कांड में “शिनाख्त परेड” का खेल ! ऑडियो फोरेंसिक से पहले ही जांच प्रभावित करने में जुटा सिस्टम ! परिवहन कार्यालय में पीड़ित ड्राइवर को बुलाकर बनवाया गया वीडियो बयान !सवालों के घेरे में डीटीओ ऑफिस, वायरल वीडियो से बढ़ा शक ! बक्सर में भ्रष्टाचार बचाने की जंग या सच दबाने की साजिश ?

 घूसखोरी कांड में “शिनाख्त परेड” का खेल ! ऑडियो फोरेंसिक से पहले ही जांच प्रभावित करने में जुटा सिस्टम ! परिवहन कार्यालय में पीड़ित ड्राइवर को बुलाकर बनवाया गया वीडियो बयान !सवालों के घेरे में डीटीओ ऑफिस, वायरल वीडियो से बढ़ा शक ! बक्सर में भ्रष्टाचार बचाने की जंग या सच दबाने की साजिश ?

बक्सर- जिले का परिवहन कार्यालय इन दिनों पूरे बिहार ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। घूसखोरी, वायरल ऑडियो, शराब बरामदगी और अब “शिनाख्त परेड” जैसे नए घटनाक्रम ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच को प्रभावित करने और सच दबाने की साजिश तक पहुंच चुका है।

ग्यारह मई से लेकर 24 मई तक चर्चा में है परिवहन कार्यालय !

11 मई 2026 को बालू लदी ट्रक को कथित रूप से पैसा लेकर छोड़े जाने का मामला सामने आया। इसके ठीक 48 घंटे बाद 13 मई को ओवरलोड कोयला लदी ट्रक को 15 हजार रुपये रिश्वत लेकर छोड़ने का आरोप लगा। परिवहन विभाग ने इस पूरे खेल का जिम्मेदार एक होमगार्ड जवान को बताया, जबकि होमगार्ड जवान ने विभाग के चर्चित सिपाही सूरज झा पर सीधे पैसे लेने का आरोप लगाते हुए ऑडियो वायरल कर दिया। ऑडियो वायरल होते ही मामला और भड़क गया। आरोप है कि परिवहन पदाधिकारी राज कुमार प्रसाद ने खुद होमगार्ड जवान को फोन कर धमकाया और कहा — “तुम नौकरी करो, हम देखते हैं।” यह ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

साहब का भी वायरल हो गया ऑडियो !

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मीडिया के सवाल पर डीटीओ ने कहा कि “अगर परिवहन विभाग में सबसे काबिल और होशियार कोई कर्मी है तो वह सूरज सिपाही है।” इस बयान के बाद लोगों में चर्चा तेज हो गई कि आखिर एक “काबिल” कर्मी का नाम बार-बार रिश्वतखोरी विवाद में क्यों आ रहा है? इधर ऑडियो वायरल करने वाले जवान को चेकपोस्ट से हटाकर 14 मई को परिवहन कार्यालय में योगदान देने का आदेश जारी कर दिया गया। उसी दिन डीटीओ कार्यालय में नगर थाना और उत्पाद विभाग की संयुक्त छापेमारी हुई, जहां कार्यालय के अलमीरा और किचेन रूम से भरी एवं खाली शराब की बोतलें बरामद हुईं। देखते ही देखते मामला बिहार की सीमा पार कर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनने लगा। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि लैब जांच से पहले ही बरामद शराब को “नन अल्कोहलिक” बताया जाने लगा।

तीन सदस्यीय जांच कमिटी गठित !

जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाई गई और 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया। लेकिन 10 दिन गुजर जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसी बीच एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। 

ड्राइवर को किसने बुलाया परिवहन कार्यालय !

वायरल वीडियो में एक कथित ड्राइवर से सवाल पूछे जा रहे हैं। ड्राइवर साफ कहता है कि उसकी गाड़ी डेढ़ टन ओवरलोड थी और “जिसने गाड़ी रोकी थी” उसने कहा था कि सुबह साहब आएंगे तो 10- 15 हजार  का जुर्माना लगाकर वाहन छोड़ दिया जाएगा। लेकिन वीडियो में मौजूद लोगों के बीच बैठे सूरज झा की पहचान ड्राइवर नहीं करता। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सूरज झा मौके पर थे तो ड्राइवर उन्हें पहचान क्यों नहीं रहा? और अगर नहीं थे, तो फिर गाड़ी की चाभी उनके पास कैसे पहुंची? सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमिटी की रिपोर्ट आने से पहले ही ड्राइवर को परिवहन कार्यालय बुलाकर वीडियो बयान किसने रिकॉर्ड कराया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल क्यों किया गया? क्या यह जांच को प्रभावित करने और बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश थी?

जिला प्रभारी मंत्री के बयान के बाद पूरा खेल बदलने की तैयारी !

हाल ही में जिले के प्रभारी मंत्री ने कहा था कि “केवल अधिकारी ही देश नहीं चलाते, उनके ऊपर भी लोग मौजूद हैं।” लेकिन जिस तरह से पूरा मामला हैंडल किया जा रहा है, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सिस्टम किसे बचाने में जुटा है

एक्शन में है बक्सर एसपी !


इधर बक्सर एसपी शुभम आर्य ने शराब बरामदगी मामले में स्पष्ट किया है कि जांच के लिए सैंपल लैब भेजा गया है।  जब तक रिपोर्ट नही आ जाता कुछ भी कहना ठीक नही है ! वही डीटीओ के बयान को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक एक बिंदुपर जांच हो रही है! 

गौरतलब है कि अब पूरे परिवहन कार्यालय पर संदेह गहराता जा रहा है। लोग डीटीओ को तत्काल हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं जमीनी जांच कराने की मांग कर रहे हैं। बक्सर में अब सवाल केवल रिश्वत का नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का बन चुका है। की जब जांच चल रही थी तो आरोप लगाने वाले ड्राइवर को परिवहन कार्यालय बुलाकर उसका वीडियो बनाकर किसने वायरल कराया!

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