बक्सर के आस्था पर प्रहार करने वाला कहा है चन्दन चोर ? 157 दिन बाद भी पुलिस का हाथ खाली ! एसडीएम आवास के बगल से करोड़ों का चन्दन कट गया, प्रहरी और सेवादारों को भनक तक नहीं लगी ! लकड़ी मिल गई, लेकिन चोर नहीं… आखिर किसकी छांव में सुरक्षित है “चन्दन गैंग” ?
बक्सर- जिस जिले की पुलिस बड़े-बड़े अपराधियों को घंटों में धूल चटा देती हो, दूसरे राज्यों तक जाकर अपराधियों को घसीट लाती हो, उसी बक्सर में एक “चन्दन चोर” ऐसा निकला जिसने पूरे सिस्टम को 157 दिनों से नाकों चने चबवा रखा है। या यूं कहें कि पुलिस से भी ज्यादा चालाक है! की अब तक पुलिस उसके गिरेबान तक नही पहुँच पाई है एसडीएम आवास से सटे मन्दिर से विशाल वृक्ष काट ले गए चोर !
21-22 दिसंबर 2025 की रात शहर के चरित्रवन स्थित नाथ बाबा मंदिर से करोड़ों रुपये मूल्य के दो चन्दन के पेड़ काट लिए गए। वह भी कोई सुनसान जंगल से नहीं, बल्कि सदर एसडीएम अविनाश कुमार के सरकारी आवास से सटे मंदिर परिसर से। आठ फीट ऊंची दीवार फांदकर चोर अंदर घुसे, आराम से पेड़ काटे, लकड़ी समेटी और फिर उसी दीवार को फांदकर निकल भी गए। लेकिन हैरत देखिए… न प्रहरी जागा, न सिस्टम हिला और न किसी को आरी चलने की आवाज सुनाई दी।
पेंड काट रहे थे या योग साधना कर रहे थे चोर ?
अब लोग तंज कस रहे हैं कि बक्सर वासियों के आस्था पर इतना बड़ा चोट करने वाला वह चन्दन चोर, शायद पेड़ काटने नहीं, “योग साधना” करने आया था, इसलिए किसी को भनक नहीं लगी। न संतरी जगे और न ही मन्दिर के सेवादार !
किसने दी चोरो को इतनी सटीक जानकारी !
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मंदिर परिसर में चन्दन का पेड़ होने की जानकारी आम लोगों तक को नहीं थी, वहां चोर इतनी सटीक जानकारी लेकर कैसे पहुंच गया ? आखिर किसने बताया कि कहां चन्दन लगा है ? कौन था जिसने रास्ता दिखाया ? और सबसे बड़ा सवाल — आखिर किसकी “कृपा दृष्टि” थी कि करोड़ों की लकड़ी कट गई और सुरक्षा व्यवस्था खर्राटे भरती रही ?लकड़ी बरामद वीआईपी चोर नही !
घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाई। गंगा किनारे यमुना घाट से चोरी की लकड़ी बरामद भी हो गई। लेकिन जिस चोर ने लकड़ी वहां फेंकी, वह आज तक नहीं मिला। अब आम आदमी पूछ रहा है — “जब लकड़ी मिल गई तो चोर कहां गया ? क्या गंगा मैया उसे बहाकर ले गईं या सिस्टम ने उसे VIP सुरक्षा दे दी ?”छोटे चोर का नही है यह करदानी !
बक्सर की गलियों में अब यह चर्चा सरेआम हो रहा है कि यह किसी छोटे-मोटे नशेड़ी चोर का काम नहीं था। यह काम ऐसे लोगों का है जिन्हें पता था कि कहां कैमरा है, कहां प्रहरी है और कहां से निकलना सुरक्षित रहेगा। तभी तो लोग अब इसे “चन्दन चोरी” नहीं बल्कि “सिस्टम की चुप्पी का महाकांड” कहने लगे हैं। पूर्व विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी तंज कसते हुए कहते है! कि राम के नाम पर सियासत करने वाले लोग आज अपने जबान पर ताला क्यो लगा लिए है! केंद्र से लेकर प्रदेश तक सरकारें उनकी है! सीबीआई ,सीआईडी तमाम सोर्स लगाकर खुलासा करवाना चाहिए ! हमलोग राम को पूजते है उनके नाम पर राजनीति नही करते है!कहा है मिथलेश भैया !
इस पूरे मामले में राजनीति ने भी खूब मसाला डाला। बीजेपी विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्रा ने बयान दिया था कि “मिथलेश तिवारी के बक्सर आते ही चोर डर गए और चन्दन की लकड़ी यमुना घाट पर फेंक दी।” अब जनता सोशल मीडिया पर तंज कस रही है — “विधायक जी, एक बार फिर मंत्री जी को बुला लीजिए… शायद इस बार चोर भी आत्मसमर्पण कर दे।”
नाथ बाबा मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि बक्सर की आस्था का केंद्र है। लेकिन जिस तरह आस्था के आंगन से चन्दन के पेड़ गायब हुए और पांच महीने बाद भी चोर कानून से बाहर घूम रहा है, उसने लोगों का भरोसा जरूर काट दिया है। अब बक्सर की जनता पूछ रही है —“अगर एसडीएम आवास के बगल में मन्दिर के चहारदीवारी के अंदर लगे चन्दन सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी आखिर किस भरोसे जिए ?” लोग पुलिस कप्तान से उस महाचोर के चेहरे को बेनकाब करने की मांग कर रहे है!






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