18 किलोमीटर की सड़क बनी सांसद-विधायक और प्रशासन के गले का नासूर, जलजमाव के बीच सियासत भी बेपानी!

 18 किलोमीटर की सड़क बनी सांसद-विधायक और प्रशासन के गले का नासूर, जलजमाव के बीच सियासत भी बेपानी ! 100 दिन में सड़क बनवाने का वादा कर चुनाव जीतने वाले बीजेपी विधायक से सवाल पूछने पर दिख रही नाराजगी! रील से बाहर रियल लाइफ में सवालों को नहीं झेल पा रहे ‘तथाकथित सिंघम’!

बक्सर - जिला मुख्यालय से डुमरांव अनुमंडल को जोड़ने वाली करीब 18 किलोमीटर लंबी बक्सर-गोलंबर-जासो-नादांव-जगदीशपुर-कुल्हड़िया-बसौली-डुमरांव मुख्य सड़क इन दिनों विकास के दावों पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी है। घुटने से अधिक जलजमाव, उखड़ी सड़क और जगह-जगह बदहाल रास्ता... हालात ऐसे हैं कि यह सड़क अब आम लोगों की परेशानी के साथ-साथ सांसद, विधायक और प्रशासन के लिए भी गले का नासूर बन गई है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में यही सड़क बड़ा चुनावी मुद्दा बनी थी। चुनाव के दौरान इस सड़क को लेकर खूब वादे हुए, जनता को भरोसा दिलाया गया कि समस्या का समाधान जल्द होगा। लेकिन चुनाव बीतने के करीब नौ महीने बाद भी तस्वीर बदलती नजर नहीं आ रही है।

झील बनी सड़क, सोशल मीडिया पर ‘मिनी गोवा’ का तंज

बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी ने इसकी बदहाली को और उजागर कर दिया है। कहीं सड़क दिखाई नहीं दे रही तो कहीं घुटने से अधिक पानी जमा है। राहगीरों की परेशानी देखकर लोग यहां पहुंचकर वीडियो और रील बना रहे हैं। कोई इसे ‘मिनी गोवा बीच’ बता रहा है तो कोई ‘झील वाली सड़क’ का नाम देकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर रहा है। इन वायरल तस्वीरों और वीडियो के जरिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक पर सवालों की बौछार हो रही है। यानी जिस सड़क को चुनाव के समय विकास की राह बनना था, वही सड़क अब सिस्टम की बदहाली का आईना बन गई है।

सड़क नहीं, ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा है यह रास्ता

यह सड़क महज बक्सर और डुमरांव को जोड़ने वाला रास्ता नहीं है। इसके जरिए दर्जनों गांवों के लोग जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। रोज कमाने-खाने वाले मजदूर, छात्र, कारोबारी, नौकरीपेशा लोग और मरीज—सभी की रोजमर्रा की जिंदगी इस सड़क से जुड़ी है। सड़क की हालत खराब होने का मतलब सिर्फ गड्ढों से गुजरना नहीं, बल्कि लोगों की पढ़ाई, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सीधा असर पड़ना है।

जलजमाव के बीच जन सुराज जिलाध्यक्ष की ‘मौन साधना’

सड़क की बदहाली के खिलाफ जन सुराज के जिलाध्यक्ष बजरंगी मिश्रा अपने समर्थकों के साथ जलजमाव वाली सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। खास बात यह रही कि यह धरना सदर बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा के कार्यालय के नजदीक हुआ। समर्थकों के साथ घंटों सड़क पर बैठे बजरंगी मिश्रा ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस रास्ते से हर दिन हजारों बच्चे पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय आते-जाते हैं। सड़क की स्थिति ऐसी है कि बच्चों के सुरक्षित घर पहुंचने तक अभिभावकों की चिंता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों खुलती है?

जिस सड़क पर 100 दिन का वादा, वही 9 महीने बाद भी सवाल

2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान सड़क का मुद्दा खूब उछला था। बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा ने चुनाव के दौरान 100 दिनों के भीतर सड़क बनवाने का वादा किया था।।चुनाव हुआ... जनता ने भरोसा जताया... विधायक जीत गए। लेकिन करीब नौ महीने बाद भी सड़क की तस्वीर वही है। बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा का कहना है कि यह राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक समस्या है। उनके मुताबिक सड़क की तस्वीर जिलाधिकारी को भेजी गई है और समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर विधायक के इस बयान को लेकर खूब तंज कसा जा रहा है। विधायक की ओर से यह भी कहा गया कि कांग्रेस विधायक के 10 साल का पाप धोने के लिए 10 महीने काफी नहीं हैं। अब बीजेपी नेताओं की डिजिटल सेना और विरोधियों के बीच इसी बयान को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं

विधायक कांग्रेस का था, लेकिन सरकार तो आपकी थी माननीय!”

 10 वर्षों में कांग्रेस विधायक की पहल पर दो बार हुआ सड़क का निर्माण!

सड़क के किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि 2015 में नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद कांग्रेस के सिंबल पर सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले तत्कालीन विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी की पहल पर 2016 में इस सड़क का पक्कीकरण हुआ था। ग्रामीणों के मुताबिक, जब वह 2020 में दोबारा चुनाव जीते तो 2021 में इस सड़क का पुनः कालीकरण हुआ। यानी ग्रामीणों का दावा है कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस विधायक की पहल पर दो बार सड़क का निर्माण और कालीकरण हुआ। अब सवाल यह है कि जब सत्ता में वही गठबंधन था, तो आज सड़क की बदहाली के लिए जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

हर दरवाजा खटखटाया, फिर भी सड़क नहीं बन पाई!

बीजेपी विधायक की ओर से पिछले दिनों लगातार यह बात कही गई कि सड़क की समस्या के समाधान के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। लेकिन जनता के सामने सवाल फिर वही है— अगर हर दरवाजा खटखटाया गया तो सड़क आखिर बनी क्यों नहीं? अगर समस्या प्रशासनिक है तो सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय कौन करेगा? अगर सरकार में सुनवाई नहीं हो रही तो जनता अपनी समस्या लेकर आखिर जाए कहां? और अगर 100 दिन में सड़क बनवाने का वादा किया गया था तो क्या उस वादे की कोई समयसीमा अब भी बची है?

सवाल पूछने पर नाराजगी क्यों?

जिस सड़क को कभी खुद ‘नासूर’ बताया गया, आज उसी सड़क को लेकर सवाल पूछे जाने पर सवाल पूछने वालों से नाराजगी क्यों? यही बात अब लोगों को सबसे ज्यादा खटक रही है। सोशल मीडिया पर लोग विधायक के पुराने चुनावी वीडियो निकालकर सवाल पूछ रहे हैं—

“क्या हुआ तेरा वादा?”

लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता से वोट मांगते समय सवाल अच्छे लगते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही जनता सवाल पूछे तो नाराजगी क्यों? और यहीं से सोशल मीडिया पर एक और तंज तेजी से चल रहा है—।रील की दुनिया में ‘सिंघम’ बनना आसान है, लेकिन रियल लाइफ में जनता के सवालों का सामना करना इतना मुश्किल क्यों?

अधिकारी बोले—सर्वे कर सरकार को भेजी रिपोर्ट

वहीं सड़क को लेकर आरडब्ल्यूडी के कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग ने संयुक्त रूप से सड़क का सर्वे किया है। सर्वे के बाद रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है।अधिकारी के मुताबिक, जैसे ही सरकार की ओर से हरी झंडी मिलती है, सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन जनता का सवाल है—हरी झंडी कब मिलेगी? क्योंकि सड़क पर पानी आज भी है और लोगों की परेशानी भी आज ही है।

दो अनुमंडल, दो विधानसभा क्षेत्र और हजारों परिवारों की जीवनरेखा

करीब 18 किलोमीटर की यह सड़क दो अनुमंडलों के साथ-साथ दो विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है। हजारों परिवारों की जिंदगी इस सड़क से जुड़ी हुई है। शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय आने-जाने वाले लोगों के लिए यह सड़क किसी जीवनरेखा से कम नहीं। लेकिन आज हालात यह हैं कि सड़क पर पानी ही पानी है और सियासत में सवाल ही सवाल। चुनाव के समय जिस सड़क पर वादों की बारिश हुई थी, आज उसी सड़क पर बारिश का पानी उन वादों की हकीकत दिखा रहा है। अब जनता का सवाल सीधा है—

100 दिन का वादा था... इंतजार कब तक?

सड़क बनेगी या ‘झील वाली सड़क’ ही बक्सर की नई पहचान बनी रहेगी?

क्योंकि जनता को अब बयान नहीं, बहाना नहीं और आश्वासन नहीं...सिर्फ सड़क चाहिए।

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