गंगा का रौद्र रूप देख सहमे पांच प्रखंड के हजारों लोग, बाढ़ की आहट से दियारा में फिर दहशत!

 गंगा का रौद्र रूप देख सहमे पांच प्रखंड के हजारों लोग, बाढ़ की आहट से दियारा में फिर दहशत! अपने किनारों को तोड़कर रिहायशी इलाकों में पहुँचने के लिए मचल रही जीवनदायिनी माँ गंगा ! प्रशासन अलर्ट !

बक्सर- कभी जीवनदायिनी कहलाने वाली गंगा इन दिनों दियारा के हजारों परिवारों के लिए डर की लहर बन गई है। नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर, उफनती लहरें और किनारों की ओर बढ़ता पानी लोगों के दिलों में पुरानी बाढ़ की तस्वीरें फिर जिंदा कर रहा है। गंगा अभी चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन दियारा के लोगों की आंखों में बाढ की दहशत साफ दिखाई देने लगी है। चौसा, बक्सर, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों में रहने वाले लोगों को अब हर बढ़ते सेंटीमीटर के साथ एक ही चिंता सताने लगी है—कहीं गंगा फिर से घर, खेत और उनकी पूरी जिंदगी को अपने साथ न बहा ले जाए।

पानी गंगा में बढ़ रहा है, लेकिन डर लोगों के घरों में पहुंच चुका है

दियारा के लोगों के लिए बाढ़ सिर्फ पानी नहीं है। बाढ़ का मतलब है—खेत में खड़ी फसल का डूब जाना, घर की चौखट छोड़ने की मजबूरी, बच्चों की पढ़ाई रुक जाना, बीमार को अस्पताल पहुंचाने की चिंता और महीनों की मेहनत को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देखना।यहां गंगा का पानी बढ़ता है तो सिर्फ नदी का स्तर नहीं बढ़ता, गरीब के माथे की चिंता भी बढ़ती जाती है।

हर साल बाढ़ आती है... हर साल आश्वासन मिलता है... लेकिन दर्द वहीं रहता है!

दियारा के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ उनके लिए कोई नई त्रासदी नहीं है। पीढ़ियां गुजर गईं, सरकारें बदल गईं, जनप्रतिनिधि बदलते रहे, राहत और बचाव के वादे होते रहे, लेकिन दियारा की जिंदगी आज भी हर बरसात में उसी डर के सामने खड़ी हो जाती है। ग्रामीण सवाल करते हैं—बाढ़ आती है तो राहत की घोषणाएं होती हैं, लेकिन जब पानी उतर जाता है तो क्या किसी को याद रहता है कि इन गांवों के लोगों ने क्या खोया था? किसी को तिरपाल मिल जाता है, किसी को थोड़ी राहत सामग्री... लेकिन जिस किसान की महीनों की मेहनत पानी में डूब जाती है, जिस परिवार का घर उजड़ जाता है, उसके दर्द का हिसाब कौन रखता है?

चेतावनी बिंदु से महज 0.73 मीटर नीचे गंगा!

गुरुवार देर शाम तक गंगा का जलस्तर 58.59 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 59.32 मीटर है। यानी गंगा चेतावनी बिंदु से महज 0.73 मीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी साहिला ने रामरेखा घाट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को संभावित बाढ़ एवं कटाव से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने का निर्देश दिया है।

दियारा में फिर गूंजने लगा वही पुराना डर

जिन घरों में लोग सामान्य जिंदगी जी रहे थे, वहां अब बातचीत का विषय बदल गया है। कितना पानी बढ़ा?कहां तक पहुंचा? रात में पानी बढ़ गया तो क्या होगा?पशुओं को कहां ले जाएंगे? बच्चों को कैसे बचाएंगे?बीमार पड़ा तो अस्पताल कैसे पहुंचेंगे? ये सवाल आज दियारा के हजारों परिवारों की रातों की नींद छीन रहे हैं।

नाव पर रोक, संवेदनशील इलाकों पर प्रशासन की नजर

बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे को देखते हुए नदी में नाव परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। संवेदनशील स्थानों पर सांकेतिक चिह्न लगाने और निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। रामरेखा घाट स्थित कंट्रोल रूम को लाइट एंड साउंड के समीप स्थापित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सूचना और राहत कार्रवाई में देरी न हो।

2025 की बाढ़ का जख्म अभी भरा भी नहीं था...

जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों को 2025 का वह मंजर याद आने लगा है, जब एक महीने के भीतर बाढ़ ने दो बार दस्तक दी थी। वह डर अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ था कि गंगा की बढ़ती लहरों ने पुराने जख्म कुरेद दिए हैं।ग्रामीणों को डर है कि अगर इस बार भी पानी ने रफ्तार पकड़ी तो फिर वही नावें होंगी, वही ऊंचे स्थान तलाशने की मजबूरी होगी, वही सामान समेटने की बेचैनी होगी और वही आंखें होंगी जो अपने घर-खेत को पानी में डूबते देखने को मजबूर होंगी।

प्रशासन तैयार है... लेकिन क्या दियारा का दर्द भी समझा गया है?

प्रशासन का कहना है कि संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी पूरी है। एसडीआरएफ की टीम मौजूद है और बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। लेकिन दियारा का सवाल सिर्फ बचाव का नहीं है। सवाल यह भी है कि हर साल बाढ़ आने के बाद लोगों को फिर उसी हाल में क्यों लौटना पड़ता है? क्यों ऐसे स्थायी इंतजाम नहीं हो सकते कि हर मानसून में हजारों परिवारों को अपने घर और खेत बचाने की चिंता में रात न गुजारनी पड़े?

रील बनाने की नहीं, जिंदगी बचाने की घड़ी है

प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने, स्नान करने, तैरने और नौका विहार से बचने की अपील की है। रील और वीडियो बनाने के लिए जान जोखिम में नहीं डालने की चेतावनी दी गई है। बच्चों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने तथा मवेशियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। क्योंकि इस वक्त गंगा का मंजर कैमरे में कैद करने से ज्यादा जरूरी है, जिंदगी को सुरक्षित रखना।

आपात स्थिति में यहां करें संपर्क

बाढ़, जलभराव या किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के 0618-3223333 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की अपील की गई है।

गंगा मां है... लेकिन जब मां का पानी रूठता है तो सबसे पहले गरीब का घर डूबता है

गंगा बक्सर की आस्था है, पहचान है और जीवन का आधार है। लेकिन जब यही नदी अपने किनारों को लांघती है तो सबसे पहले उन लोगों की दुनिया डूबती है, जिनकी जिंदगी पहले से ही संघर्ष के सहारे चल रही है।किसी के लिए गंगा एक नदी है, लेकिन दियारा के गरीब के लिए यही गंगा कभी खेत है, कभी रोजी-रोटी है और कभी डर बनकर उसके दरवाजे पर खड़ी हो जाती है। फिलहाल जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन अलर्ट है, एसडीआरएफ तैयार है और दियारा पर निगाहें टिकी हैं। 

लेकिन गंगा की उफनती लहरों के बीच दियारा के हजारों परिवारों की आंखों में एक ही सवाल तैर रहा है—

क्या इस बार गंगा सिर्फ चेतावनी देकर लौट जाएगी...

या फिर किसी मां की गोद, किसी किसान की फसल और किसी गरीब का आशियाना फिर अपने साथ बहा ले जाएगी?

और सबसे बड़ा सवाल—

हर साल बाढ़ आती है, हर साल लोग उजड़ते हैं, हर साल राहत के वादे होते हैं... आखिर दियारा के लोगों को हर साल अपना दर्द साबित क्यों करना पड़ता है?

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