बोले भाजपा नेता प्रदीप राय सभी लेनदेन हुआ है वैध ! जनता को गुमराह कर रहे है पूर्व विधायक ! अजित कुशवाहा ने किया पलटवार कहा हसुआ के विवाह में खुरपी का गीत गा रहे है प्रदीप राय !! सवालों का दे सीधा जवाब !

जमीन से सत्ता तक: बक्सर में सियासत की जंग तेज काग़ज़ बनाम कोर्ट, बयान बनाम सवाल! ‘सब वैध’ का दावा, ‘जालसाज़ी’ का आरोप 144 हटाने की उपलब्धि या जनता को भरमाने की कोशिश? ज्योति चौक बनेगा सच–झूठ की खुली अदालत !

बक्सर- जिले की राजनीति एक बार फिर जमीन विवाद के बहाने उबाल पर है। बीजेपी नेता प्रदीप कुमार राय और डुमरांव के पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह आमने-सामने हैं। फर्क साफ है—एक पक्ष दस्तावेज़ों, रजिस्ट्री और वैधानिक प्रक्रिया को सच की कसौटी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कोर्ट में लगे धाराओं, जमीन पर हुए कथित निर्माण और न्यायिक सवालों को असली पैमाना मान रहा है। बीजेपी नेता प्रदीप कुमार राय ने प्रेस वार्ता कर पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि पूरे मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

सभी लेन-देन पूरी तरह वैध’ : प्रदीप राय

प्रदीप राय के मुताबिक संबंधित भूमि से जुड़ा हर लेन-देन कानून सम्मत है। वर्ष 2011 से 2016 तक की पूरी प्रक्रिया—पावर ऑफ अटॉर्नी, कबाला, दाखिल-खारिज और नामांतरण—सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी स्तर पर न तो फर्जीवाड़ा हुआ है और न ही नियमों का उल्लंघन। यहां तक कि यदि किसी को संदेह है, तो वे फोरेंसिक जांच के लिए भी तैयार हैं।

पूर्व विधायक का तीखा पलटवार

कागजों की इस मजबूत दीवार के बीच पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह का पलटवार सियासत को एक अलग ही दिशा में मोड़ देता है। वे सवाल उठाते हैं—मुद्दा उनके ससुर से विवाद का नहीं, बल्कि उस जमीन का है जिस पर कथित रूप से जबरन बाउंड्री कराई गई। उनका तर्क सीधा और चुभने वाला है—अगर सब कुछ इतना ही वैध है, तो IPC की धारा 467 और 471 जैसे गंभीर प्रावधान कोर्ट ने कैसे लगाया ?

नैरेटिव बनाम नैतिकता

 यह मामला अब केवल भूमि विवाद नहीं रह गया है, बल्कि नैरेटिव बनाम नैतिकता की लड़ाई में बदल गई है। प्रदीप राय जहां यह कहकर खुद को मजबूत बताते हैं कि अब तक किसी भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है, वहीं पूर्व विधायक यह याद दिलाते हैं कि कोर्ट द्वारा संज्ञान लिया जाना ही अपने आप में गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उनके अनुसार 144 हटवाना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, असली सवाल यह है कि कोर्ट के सवालों और आदेशों का सीधा जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा।

दो रणनीतियों की सीधी भिड़ंत

राजनीतिक नजरिए से देखें तो बक्सर में इस वक्त दो रणनीतियों की खुली टकराहट दिख रही है। एक ओर सत्ता-समीप खड़ा नेता है, जो प्रशासनिक आदेशों और दस्तावेज़ों के सहारे खुद को सुरक्षित साबित करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर एक पूर्व विधायक है, जो खुद को जनता, जमीन और कथित पीड़ितों की आवाज़ के रूप में पेश कर रहा है। उनकी भाषा भले आक्रामक हो, लेकिन निशाना सीधा भावनाओं पर है—गरीब, जमीन और अन्याय।

ज्योति चौक पर उतरेगी सियासत

पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह ने अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस शहर के बीचोबीच ज्योति चौक पर करने का ऐलान कर साफ कर दिया है कि वे इस विवाद को एसी कमरों से निकालकर सड़क और जनता की अदालत में ले जाना चाहते हैं। यह वही राजनीतिक दांव है, जहां फाइलें कमजोर और सवाल मजबूत हो जाते हैं।

अब फैसला किसका?

इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी नेता प्रदीप राय जहां लगातार बचाव की मुद्रा में दिख रहे हैं, वहीं पूर्व विधायक कोर्ट के आदेशों को आधार बनाकर इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर अड़े हैं। उनके मुताबिक यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जो कथित रूप से ताकतवरों को बचाती है।

गौरतलब है कि बक्सर में ‘जमीन हड़पने’ बनाम ‘जनता को गुमराह करने’ के आरोपों के बीच यह सियासी जंग अब दो बुनियादी सवालों पर टिक गई है—क्या काग़ज़ ही आख़िरी सच हैं, या जमीन पर दिखने वाला सच ज़्यादा भारी है? और क्या जनता कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी, या अपना फैसला पहले ही सुना देगी? इन सवालों के जवाब शायद फाइलों में नहीं, बल्कि ज्योति चौक पर खड़ी जनता के बीच मिले !

Post a Comment

0 Comments