सरकारी दफ्तर या शराबखाना? गार्ड रूम में रखे “डीटीओ” लिखी अलमीरा से निकली शराब, पूर्व IPS विधायक आनन्द मिश्रा का सिस्टम पर सीधा हमला! “कोई भी आकर शराब रख जाएगा तो फिर कानून किसके लिए है?” लीपापोती पर गरजे विधायक – “जरूरत पड़ी तो बड़े साहब की भी होगी जांच!” बक्सर में शराब कांड पर सत्ता-विपक्ष दोनों हुआ हमलावर, सिस्टम की साख पर सबसे बड़ा सवाल!
बक्सर – बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सरकार भले ही रोज बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बक्सर में परिवहन विभाग के सरकारी कार्यालय से मिली दर्जनों शराब की बोतलों ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 72 घंटे के भीतर परिवहन विभाग से जुड़े लगातार तीन विवाद सामने आने के बाद भी कार्रवाई की धीमी रफ्तार अब प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “साहब” की “बड़का साहब” से नजदीकियां ही अब तक की चुप्पी की सबसे बड़ी वजह है।आम आदमी होता तो जेल में सड़ता !
लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि अगर यही मामला किसी आम आदमी से जुड़ा होता, तो अब तक उसका पूरा परिवार जेल में होता, घर सील हो चुका होता और अपराधी की तरह पेश किया जा रहा होता। लेकिन यहां मामला सरकारी दफ्तर का है, इसलिए कार्रवाई की जगह बयानबाजी और लीपापोती का खेल चल रहा है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले निर्भीक होमगार्ड जवान से भी नगर थाने में घंटों पूछताछ की गई है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या असली दोषियों तक पहुंचने के बजाय किसी “बलि के बकरे” की तलाश की जा रही है?
“सरकारी कार्यालय है या धर्मशाला?”
मामले में लगातार बदलते बयानों और अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने पूरे प्रशासनिक सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग व्यंग्य करते हुए पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा कौन सा सरकारी कार्यालय है जहां कोई भी व्यक्ति आए, शराब रखकर चला जाए और किसी को भनक तक न लगे? इसी मुद्दे पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और वर्तमान सदर विधायक Anand Mishra ने प्रशासन पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “वह सरकारी कार्यालय है, कोई सार्वजनिक धर्मशाला नहीं जहां कोई भी आकर कुछ भी रख दे। आखिर बक्सर में चल क्या रहा है?” विधायक ने साफ कहा कि वह इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। साथ ही जो अधिकारी गैरजिम्मेदाराना बयान देकर मामले को हल्का दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी भूमिका की भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा, “मैं खुद पुलिस अधिकारी रहा हूं, चीजों को बारीकी से समझता हूं। यह कोई साधारण अपराध नहीं है कि कह दिया जाए बाहरी लोगों ने शराब रख दी। अगर सरकारी कार्यालय में शराब मिल रही है तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है। इस मामले में नेम्ड एफआईआर होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं उन पर सीधी कार्रवाई होनी चाहिए।” मामले की गहराई से जांच हो !विपक्ष भी हमलावर आंदोलन की तैयारी !
वहीं पूर्व सदर विधायक Sanjay Tiwari उर्फ मुन्ना तिवारी ने भी पूरे मामले में पुलिस और जिला प्रशासन पर लीपापोती का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री समेत कई वरीय अधिकारी को पत्र लिखते हुए कहा कि “देश संविधान से चलता है और कानून सबके लिए बराबर है। जब आम आदमी की संपत्ति सील होती है तो सरकारी दफ्तर क्यों नहीं?” पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून का इस्तेमाल आम जनता पर सख्ती दिखाने के लिए किया जाता है, लेकिन जब मामला सरकारी विभागों से जुड़ता है तो नियम-कानून सब बदल जाते हैं।अलमीरा पर लिखा था “DTO”
परिवहन कार्यालय परिसर से दर्जनों शराब की बोतलें बरामद हुई थीं। कुछ बोतलें भरी हुई थीं तो कई खाली अवस्था में मिलीं। बरामदगी गार्ड रूम में रखी तीन अलमीरा और किचेन से हुई। वायरल लाइव वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक अलमीरा पर “DTO” लिखा हुआ है। आखिर आलमीरा के अंदर शराब रख कर अज्ञात लोगों ने शराब गटक ली और पता भी नही चला !
फिलहाल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है — अगर सरकारी कार्यालय में शराब पहुंची, रखी गई और कथित तौर पर पी भी गई, तो आखिर जिम्मेदार कौन है? और क्या इस बार भी पूरा मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा या सचमुच किसी बड़े चेहरे पर कार्रवाई होगी? जो पूरे बिहार के लिए मिशाल बने !



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