“ज्ञान, धर्म और रोजगार का संगम बनेगा बक्सर” ! विश्वामित्र कॉरिडोर से पर्यटन क्रांति की तैयारी ! एयरपोर्ट, यूनिवर्सिटी और पंचकोसी विकास की उठी मांग ! “राम की शिक्षास्थली बने आधुनिक गुरुकुल” — राजकुमार चौबे ! “अब बक्सर सिर्फ जिला नहीं, धार्मिक राजधानी बनेगा”
बक्सर- धर्म, ज्ञान, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत की पावन धरती बक्सर एक बार फिर बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। विश्वामित्र सेना ने अब बक्सर को “धार्मिक राजधानी” के रूप में विकसित करने का खुला अभियान छेड़ दिया है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने बक्सर पहुंचकर साफ कहा कि यह लड़ाई केवल मंदिरों या धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि बक्सर के गौरव, अस्मिता, शिक्षा, रोजगार और पर्यटन आधारित भविष्य की लड़ाई है।
केवल मिला वादों का जुमला !
राजकुमार चौबे ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और भगवान राम की शिक्षास्थली रहे बक्सर को आजादी के बाद वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी यह धरती हकदार थी। उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां के लोग धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और विकास की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व ने केवल वादे किए। अब समय आ गया है कि बक्सर को धार्मिक पर्यटन, उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित किया जाए।जमीन पर लेने होंगे बड़े फैसले !
उन्होंने सम्राट चौधरी द्वारा भगवान वामन अवतार को केंद्रीय कारा परिसर से मुक्त कराने की दिशा में की गई पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने पहली बार बक्सरवासियों की भावनाओं का सम्मान किया है। मुख्यमंत्री द्वारा वामन भगवान मंदिर और रामेश्वरम मंदिर में पूजा-अर्चना को उन्होंने ऐतिहासिक संकेत बताते हुए कहा कि अब सरकार को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जमीन पर बड़े फैसले लेने होंगे। राजकुमार चौबे ने कहा कि विश्वामित्र सेना का सपना है कि बक्सर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटी स्थापित हो, जहां ज्ञान, विज्ञान, वेद और आधुनिक शिक्षा का संगम हो। उन्होंने कहा कि “राम की शिक्षास्थली” को आधुनिक गुरुकुल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि यहां से विद्वानों के साथ वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी निकलें। उनका कहना था कि शिक्षा ही बक्सर को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाएगी।पर्यटन की अपार सम्भावनाये !
उन्होंने कहा कि बक्सर में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पंचकोसी यात्रा, महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि, वामन भगवान मंदिर और रामायणकालीन विरासत को यदि योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और पर्यटन सेवाओं के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। विश्वामित्र सेना ने अब “विश्वामित्र कॉरिडोर” निर्माण, एयरपोर्ट स्थापना और पंचकोसी यात्रा मार्ग के व्यापक विकास को अपनी अगली बड़ी लड़ाई बताया है। राजकुमार चौबे ने कहा कि यदि सरकार गंभीरता से इन परियोजनाओं पर काम करे तो बक्सर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट बनने से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।जिले को नही मिला उसका हक !
उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों तक बक्सर ने कई सांसद, मंत्री और विधायक दिए, लेकिन जिले को उसका हक नहीं मिला। अब जनता केवल भाषण नहीं, बल्कि विकास का परिणाम देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र सेना राजनीति नहीं, बल्कि बक्सर की सनातन विरासत, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार आधारित विकास की लड़ाई लड़ रही है।गौरतलब है कि बक्सर में विश्वामित्र सेना के इस अभियान के बाद जिले में नई धार्मिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि यदि धार्मिक पर्यटन, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर गंभीरता से काम हुआ तो आने वाले वर्षों में बक्सर बिहार की नई सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन सकता है।





0 Comments