साहब की मौन सहमति से सोन नहर की सरकारी जमीन पर कब्जा? गरीबों की बस्ती उजाड़ी, माफियाओं के लिए बिछे पेवर ब्लॉक! बस स्टैंड के सामने खुलेआम अतिक्रमण,

साहब की मौन सहमति से सोन नहर की सरकारी जमीन पर कब्जा? गरीबों की बस्ती उजाड़ी, माफियाओं के लिए बिछे पेवर ब्लॉक! बस स्टैंड के सामने खुलेआम अतिक्रमण, प्रशासन मौन! पूर्व विधायक ने खोला मोर्चा, सोशल मीडिया पर उबाल एफआईआर और कार्रवाई का भरोसा, सवाल– कब हटेगा अतिक्रमण?



बक्सर- बिहार के बक्सर जिले में एक बार फिर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोन नहर की जिस जमीन पर दो साल पहले जलस्रोत का हवाला देकर कड़ाके की ठंड में गरीब परिवारों को लाठी के बल पर उजाड़ दिया गया था, उसी जमीन पर अब दिन के उजाले में पेवर ब्लॉक बिछाकर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह अतिक्रमण शहर के सबसे व्यस्त इलाके, बस स्टैंड के ठीक सामने उत्तर दिशा में हुआ है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही आम बात है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन गरीब परिवारों ने हाथ जोड़कर मोहलत की भीख मांगी थी, उन्हें एक पल में बेघर कर दिया गया, लेकिन जब रसूखदारों ने उसी सोन नहर की जमीन पर कब्जा करना शुरू किया तो नहर विभाग और नगर परिषद के अधिकारी मूकदर्शक बन गए। लोगों का कहना है कि यह सीधा-सीधा दोहरा मापदंड है, जिसमें कानून गरीबों के लिए सख्त और प्रभावशाली लोगों के लिए नरम नजर आता है।

सोशल मीडिया पर जबरदस्त जंग

मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त जंग छिड़ गई है। फेसबुक सहित अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग प्रशासन की चुप्पी को “मौन सहमति” करार दे रहे हैं। यूजर्स का आरोप है कि सत्ता के करीबी और दबंग नेताओं को सरकारी जमीन हड़पने की खुली छूट मिल गई है, यही वजह है कि अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।

पूर्व विधायक के पोस्ट से उठा सियासी बवंडर

इसी बीच पूर्व विधायक डॉक्टर अजित कुमार सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट ने मामले को और हवा दे दी है। अपने पोस्ट में उन्होंने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा कि गरीबों की झोपड़ी उजाड़ने में 48 मिनट भी नहीं लगते, लेकिन यहां 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अधिकारी यह पता नहीं कर पाए कि नहर की जमीन पर कब्जा कौन कर रहा है। उन्होंने डीएम के आदेशों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रसूखदारों के सामने प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। साथ ही आरोप लगाया कि जिन मंत्रियों की छवि माफियाओं पर बुलडोजर चलाने वाली बताई जाती है, उन्हीं के यहां इन लोगों का उठना-बैठना है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो पा रही।

आम लोगों में उबाल

सोशल मीडिया पर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तीखी हैं। कई यूजर्स ने लिखा है कि अगर यही जमीन किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति ने घेरी होती, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर प्रशासन किससे डर रहा है और किसके दबाव में कानून पर आंख मूंदे बैठा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस पूरे मामले पर जब नहर विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो एसडीओ ने बताया कि उन्हें अतिक्रमण की जानकारी है। उन्होंने कहा कि कार्यपालक अभियंता के आदेशानुसार रविवार, 8 फरवरी को एफआईआर दर्ज कर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस बयान के बाद भी लोग आशंकित हैं कि कहीं यह मामला भी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रह जाए।

सवाल बरकरार

गौरतलब है कि बक्सर में सोन नहर की जमीन पर कब्जे का यह मामला अब प्रशासन की कार्यशैली, निष्पक्षता और राजनीतिक दबावों को उजागर करता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने दावों पर खरा उतरता है या फिर यह अतिक्रमण भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता की नजरें अब कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि कानून के समान रूप से लागू होने का है।


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