लापता हुए चुनावी वादों के सौदागर! ! कमीशन की सड़ांध में डूबी बक्सर की लाइफलाइन सड़क ! 15 किमी की बदहाली, 4 साल का झूठा मेंटेनेंस !

 लापता हुए चुनावी वादों के सौदागर! ! कमीशन की सड़ांध में डूबी बक्सर की लाइफलाइन सड़क !  15 किमी की बदहाली, 4 साल का झूठा मेंटेनेंस पंचकोशी आस्था के रास्ते पर भ्रष्टाचार का पत्थर समृद्धि यात्रा में ग्रामीण दिखाएंगे ‘रील वाला विकास’ नहीं, असली सच्चाई बिहार में विकास के बड़े-बड़े दावे और चुनावी जुमलों की पोल खोलती यह विकास की सड़क पर सवाल !

बक्सर- बिहार में विकास के पोस्टर, होर्डिंग और भाषणों की चकाचौंध के बीच बक्सर–नंदाव–जगदीशपुर–कुल्हड़िया–डुमरांव मुख्य पथ आज बदहाली की ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसे देखकर खुद “विकास” भी शर्म से मुंह फेर ले। जिला मुख्यालय से सटे सदर प्रखंड की करीब 15 किलोमीटर लंबी यह सड़क सरकार, जिला प्रशासन और चुनावी मंचों पर छाती पीटने वाले सफेदपोश नेताओं के लिए चलती-फिरती चार्जशीट बन गई है।

बनने के साथ ही तास की पत्तो की तरह बिखर गई थी यह सड़क !

2021 में जिस सड़क को भविष्य की रीढ़ बताया गया था, वह निर्माण के साथ ही ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मगर जिम्मेदारों की आंखों पर विकास नहीं, कमीशन का काजल चढ़ा था। ग्रामीण चीखे, लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर वही पुराना नुस्खा अपनाया गया—मेंटेनेंस का कोरम पूरा, फाइल बंद और जेब गर्म। कागजों में सड़क दौड़ती रही, जमीन पर गड्ढे राज करते रहे।

ग्रामीणों के आरोप से उड़ा अधिकारियों का नींद !

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के वक्त ही घटिया सामग्री का खुला खेल दिख रहा था। पथ निर्माण विभाग के तथाकथित इंजीनियरों ने काम रोकने के बजाय रफ्तार बढ़ाई—ताकि सड़क नहीं, कमीशन जल्दी पूरा हो जाए। नतीजा यह कि सड़क बनने से पहले ही टूट गई और हर साल “मेंटेनेंस” के नाम पर उसकी लाश पर चादर डाल दी गई। अब अंतिम वर्ष में सिक्योरिटी राशि निकालने के लिए फिर वही पुराना ड्रामा खेला जा रहा है, जिसका विरोध गांव से लेकर सत्ताधारी दल के स्थानीय नेता तक कर रहे हैं।

पंचकोशी परिक्रमा यात्रा मुख्य पथ

यह वही रास्ता है, जिससे होकर अगहन मास में विश्व प्रसिद्ध पंचकोशी परिक्रमा यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु नारद मुनि के आश्रम नंदाव पहुंचते हैं। आस्था के इस पवित्र मार्ग पर विकास के नाम पर ईंट के टुकड़े गिराकर पर्यटन फंड का प्रसाद खुद चट कर लिया गया। स्थानीय मुखिया से खानापूरी कराकर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने की कोशिश हुई, लेकिन हकीकत जस की तस है। श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग अब आस्था नहीं, दुर्घटना यात्रा बनता जा रहा है।

कागजी विकास के दावे !

कुल्हड़िया, नंदाव, जगदीशपुर, जासो-बसवली और सुरौंधा के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि जब 15 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बक्सर आए थे, तब शहर की अच्छी-भली सड़क को तोड़कर रातों-रात चमका दिया गया। जो शिकायत करने निकले, उन्हें हिरासत का स्वाद चखा दिया गया। लेकिन इस बार मुकाबला शहर के कैमरा-फ्रेंडली चेहरों से नहीं, खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों से होगा—जो रील नहीं बनाते, हकीकत जोतते हैं। समृद्धि यात्रा में हजारों ग्रामीण लिखित शिकायत सौंपकर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट और दोषी इंजीनियरों की बर्खास्तगी की मांग करेंगे।

सीएम से लिखित शिकायत की तैयारी में पार्टी के नेता !

सत्ताधारी दल जदयू के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने भी खुलकर कहा है कि जिले में इससे घटिया सड़क शायद ही कोई हो। चुनाव के वक्त इसे पेरिस–लंदन बनाने के सपने दिखाए गए थे, लेकिन जीतते ही सपने बेचने वाले नेतृत्व समेत गायब हो गए। अब पार्टी स्तर से मुख्यमंत्री को लिखित मांग दी जाएगी कि इस सड़क के ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और जिम्मेदार इंजीनियरों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

कमीशन खोरी के चंगुल में फंसा है बक्सर !

वहीं विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बक्सर को कमीशनखोरों के जाल में फंसा जिला बताया। उन्होंने कहा कि यदि त्रेतायुग से जुड़ी पंचकोशी परिक्रमा जैसे धार्मिक मार्ग की यह हालत है, तो विकास के दावों की असलियत समझी जा सकती है। ईमानदार काम होता तो बक्सर आज अयोध्या, काशी और मथुरा से भी बड़ा पर्यटन केंद्र होता, लेकिन यहां विकास सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सिमट गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन ‘खूबसूरत बक्सर’ का पोस्टर तैयार कर रहा है, जबकि ग्रामीण टूटी सड़क को आईना बनाकर पूरे सिस्टम का चेहरा दिखाने की तैयारी में हैं। यह सड़क चलने के लिए नहीं, सिर्फ रील और भाषण के लिए छोड़ी गई है—और यही कड़वा सच अब सत्ता और प्रशासन की आत्मा तक चुभने वाला है।

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