दुनिया की अद्भुत झील वाली सड़क देखनी हो तो आइये विश्वामित्र की नगरी बक्सर में ! विकास का दिखेगा जीवंत मॉडल !”

 “सड़क या झील? बक्सर में ‘विकास’ जमीन पर निल !“18 किलोमीटर में तैरती सियासत ! “वादों की नाव सड़क में डूबी, गड्ढों में तैरता रहा जनविश्वास!”“सेल्फी स्पॉट बनी सड़क, जिम्मेदारों की उड़ी नींद!” “सर्वे के इंतजार में सिस्टम, पानी में बहती जनता की उम्मीद!”

बक्सर—जिला मुख्यालय के सदर विधानसभा क्षेत्र को डुमरांव से जोड़ने वाली 18 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों ‘विकास’ का ऐसा जीवंत मॉडल बन गई है, जिसे देखने के लिए अब स्थानीय ही नहीं बल्कि पड़ोसी गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं। बक्सर गोलम्बर से जासो, भैया नदाव, कुल्हड़िया, बसौली होते हुए डुमरांव तक जाने वाली यह सड़क अब सड़क कम और झील ज्यादा नजर आती है। हालात यह हैं कि गड्ढों में जमा पानी ने इसे स्थायी जलाशय का रूप दे दिया है, और लोग तंज कसते हुए इसे “दुनिया की अद्भुत झील वाली सड़क” बता रहे हैं।

सड़क बना सेल्फी पॉइन्ट !

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो ने इस सड़क को एक तरह से ‘पर्यटन स्थल’ बना दिया है। लोग यहां आकर सेल्फी ले रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं और कैप्शन दे रहे हैं—“अगर जिंदगी में कुछ अनोखा देखना हो तो बक्सर आइए।” कुछ इसे ‘विकास का आईना’ बता रहे हैं तो कुछ ‘सियासत की सड़ी हुई तस्वीर’।

दरअसल, यह सड़क 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बनी थी। वर्षों से जर्जर इस मार्ग को लेकर जनता में भारी नाराजगी थी। चुनाव के दौरान नेताओं ने इसे लेकर बड़े-बड़े वादे किए। और 100 दिन में इस सड़क को ठीक करने” वाला बयान खूब चर्चा में रहा। जनता ने भी इस भरोसे पर खुलकर मतदान किया और सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ कर दिया। लेकिन चुनाव के पांच महीने बाद भी जब हालात जस के तस है, तो जनता के सब्र का बांध टूटने लगा है। सड़क की दुर्दशा पर लगातार खबरें चलने लगीं और आखिरकार विभागीय अधिकारियों की नींद टूटी। आनन-फानन में सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर भी सियासी श्रेय लेने की होड़ मच गई, जबकि यह पूरी तरह विभागीय प्रक्रिया थी।


सुर्ख़ियो में है सड़क !

अब एक बार फिर यह सड़क सुर्खियों में है। हाल ही में सदर विधायक आनंद मिश्रा ने बयान दिया कि यह सड़क गले का “नासूर” बन चुकी है और एक सप्ताह के अंदर इसका टेंडर आएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के साथ ही सड़क निर्माण का काम तेज हो सकता है। बक्सर के विकास के लिए मास्टर प्लान बनाकर तैयार किया गया है! अलग -अलग जोन में बांटकर इसका  विकास किया जाएगा !

सर्वे के बिना कैसे होगा टेंडर !
वहीं, विभागीय अधिकारियों की मानें तो मामला इतना सरल नहीं है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण से पहले विस्तृत सर्वे जरूरी है, जिसके बिना टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। साथ ही बरसात का मौसम नजदीक होने के कारण काम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। एक अधिकारी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा—“यह चावल नहीं है कि कुकर में डालकर तुरंत पका दें, इसके लिए पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।”

राम के चाहने वालो कि चुप्पी !
इस बीच, स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यह सड़क न केवल आवागमन में बाधा बन रही है, बल्कि दुर्घटनाओं का भी कारण बन रही है। खास बात यह है कि यह मार्ग धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम के पंचकोशी यात्रा से जुड़े स्थल इसी रास्ते पर पड़ते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी लोगों को और खटक रही है। फिलहाल, बक्सर की यह ‘झीलनुमा सड़क’ विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जनता इंतजार कर रही है—सर्वे का, टेंडर का, और उस दिन का जब यह सड़क फिर से सड़क जैसी दिखेगी, न कि एक तैरता हुआ सियासत की तरह 

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