“गालीबाज डीपीएम का ऑडियो वायरल, सिस्टम की सड़ी सच्चाई उजागर!” “मनीष कुमार की हनक के आगे खामोश अफसरशाही!”

 “गालीबाज डीपीएम का ऑडियो वायरल, सिस्टम की सड़ी सच्चाई उजागर!” “मनीष कुमार की हनक के आगे खामोश अफसरशाही!” “जांच रिपोर्ट दबी, छोटे कर्मचारी पर गिरी गाज!” “गाली, दबाव और भ्रष्टाचार—स्वास्थ्य विभाग में ‘तानाशाही राज’!” “बक्सर में अफसरशाही बेलगाम, सवालों से भागते जिम्मेदार!”

बक्सर-  जिले के स्वास्थ्य विभाग में तैनात डीपीएम मनीष कुमार का एक आपत्तिजनक ऑडियो वायरल होने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। इस वायरल ऑडियो में डीपीएम अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी को खुलेआम मां-बहन की गालियां देते हुए सुने जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारी बार-बार यह कहता सुनाई दे रहा है कि उसने काम पूरा कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद डीपीएम का गुस्सा और गालियों की बौछार थमने का नाम नहीं लेती। 

ऑडियो वायरल जांच पूरा !

गालीबाज डीपीएम का ऑडियो वायरल होने के बाद विभागीय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच कमिटी का गठन किया गया। कमिटी ने पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंप दी है। लेकिन रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह मान लिया जाए कि अफसरशाही के आगे सिस्टम घुटने टेक चुका है

छोटी मछली बन गई बडे अफसरों का निवाला !

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस कर्मचारी के साथ गाली-गलौज हुई, उसी पर कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित करा दिया गया। बिना किसी ठोस जांच और पक्ष सुने ही छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया गया। इससे विभाग के अन्य कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीपीएम का यह रवैया नया नहीं है, बल्कि उनके पास ऐसे कई ऑडियो और वीडियो मौजूद हैं, जो समय आने पर सामने लाए जाएंगे।

सवाल सुनते ही डीपीएम ने झुकाया सर!


जब इस पूरे मामले को लेकर डीपीएम मनीष कुमार से ऑन कैमरा सवाल पूछा गया, तो उनका रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया। कैमरे के सामने उन्होंने सिर झुकाकर चुप्पी साध ली और तब तक कुछ नहीं बोले जब तक कैमरा बंद नहीं हो गया। यह चुप्पी खुद में कई सवाल खड़े करती है—क्या यह अपराधबोध है या सत्ता का अहंकार?

क्या कहते है अधिकारी ?

वहीं, इस मामले में एसीएमओ डॉ. बिनोद प्रताप सिंह ने पुष्टि की कि तीन सदस्यीय जांच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है और अब आगे की कार्रवाई वरीय अधिकारियों के स्तर से होगी लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

पहले भी दोषी पाए गए है डीपीएम -सूत्र !

सूत्रों की मानें तो डीपीएम मनीष कुमार पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार के एक मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कमिटी गठित हुई थी, जिसमें डीपीएम और तत्कालीन सिविल सर्जन दोनों को दोषी पाया गया था। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह साफ संकेत देता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में उनकी पकड़ मजबूत है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बक्सर का स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ऐसे ही दबाव और दादागिरी के साये में काम करता रहेगा? क्या छोटे कर्मचारियों की इज्जत और अधिकारों की कोई कीमत नहीं? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?फिलहाल, वायरल ऑडियो ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिला प्रशासन की निष्क्रियता को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या फिर सिस्टम यूं ही ‘गाली संस्कृति’ के सहारे चलता रहेगा

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