“एनकाउंटर की भाषा में विकास का भाषण, जनता पूछे जिम्मेदार आखिर कौन?”“फोटो सेशन में व्यस्त सिस्टम, धूल फांकती जनता!” “खादी बनाम कॉन्ट्रैक्ट कर्मी: बक्सर में किसका खेल भारी?” “21 साल की सत्ता, फिर भी अस्पताल और सड़कें बदहाल क्यों?”“बयानों की राजनीति में फंसा बक्सर, काम अब भी लापता!”
बक्सर — जिले की राजनीति इन दिनों बयान, बहस और आरोपों की ऐसी भट्ठी में तप रही है, जहां जनता विकास नहीं बल्कि व्यवस्था का असली चेहरा देख रही है। कभी “डायसिंग एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” के नाम से चर्चित रहे पूर्व आईपीएस और वर्तमान बीजेपी सदर विधायक आनन्द मिश्रा ने अब जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सदर अस्पताल की व्यवस्था तक पर खुला हमला बोल दिया है। विधायक का आरोप है कि जिले में अधिकारी धरातल पर काम करने के बजाय “फोटो सेशन” में व्यस्त हैं और निकम्मे लोगों की पहचान तक नहीं कर पा रहे। लेकिन अब सवाल जनता पूछ रही है। यदि सिस्टम इतना सड़ा हुआ है, तो आखिर पिछले दो दशकों से सत्ता में बैठी सरकार क्या कर रही थी? क्या यह वही व्यवस्था नहीं है जिसे सुधारने का दावा कर जनता से वोट लिया गया था?विधायक वर्सेज मैनेजर का जंग !
सदर अस्पताल को लेकर विधायक और कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत मैनेजर दुष्यंत सिंह के बीच छिड़ी जंग अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। विधायक अस्पताल प्रबंधन के बजाये मैनेजर पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जिन नेताओं की पार्टी वर्षों तक स्वास्थ्य मंत्रालय संभालती रही, उन्होंने अस्पताल को बदहाल होने से क्यों नहीं रोका? जनता के बीच अब चर्चा इस बात की ज्यादा है कि लड़ाई अस्पताल सुधार की है या अस्पताल पर पकड़ मजबूत करने की।
कौन है तिवारी जी ? क्या है कनेक्शन ?
अस्पताल परिसर में इलाज कराने पहुंचे कई लोगों का कहना है कि असली खेल कहीं और चल रहा है। लोगों के बीच “तिवारी जी” नाम की चर्चा जोरों पर है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कौन हैं ये तिवारी जी? क्या उनका स्वास्थ्य व्यवस्था और राजनीति से कोई गहरा संबंध है? क्या अस्पताल में प्रभाव कायम करने की लड़ाई के बीच मैनेजर बाधा बन गया है?गलत लोगो पर कौन करेगा कार्रवाई !
वहीं दूसरी तरफ विधायक द्वारा अधिकारियों को निकम्मा बताने पर भी जनता का गुस्सा अब सत्ता की ओर मुड़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक टूटी सड़कें, उड़ती धूल और अधूरे विकास कार्य लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। आरोप है कि कई विभागों में एक ही ठेकेदार को कई-कई टेंडर दे दिए जाते हैं, जबकि उसके पास काम पूरा करने की क्षमता तक नहीं होती। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर अधिकारी गलत हैं तो उन पर कार्रवाई कौन करेगा? क्योंकि सरकार भी उन्हीं की है और सत्ता भी।माहौल निर्माण की चल रही है राजनीति !
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बक्सर में इस समय “माहौल निर्माण” की राजनीति चल रही है। जनता के बीच खुद को सिस्टम से लड़ने वाला चेहरा दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अब लोग समझने लगे हैं कि बयान और कैमरों से सड़कें नहीं बनतीं, अस्पताल नहीं सुधरते और व्यवस्था नहीं बदलती।
क्या कहते है स्थानीय लोग ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरोना काल में जिस मैनेजर ने अस्पताल में दिन-रात रहकर काम किया, आज वही कुछ लोगों की आंखों की किरकिरी बन गया है। आरोप यह भी है कि अस्पताल में बिचौलियों की भूमिका खत्म होने से कई लोगों के हित प्रभावित हुए हैं। इसलिए अब उसे हटाने का माहौल तैयार किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि अगर विधायक सच में बदलाव चाहते हैं, तो केवल बयानबाजी क्यों? मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों से सीधे कार्रवाई की मांग क्यों नहीं? जनता अब भाषण नहीं, परिणाम देखना चाहती है। क्योंकि बक्सर की सड़कों पर उड़ती धूल और अस्पतालों की बदहाली यह बता रही है कि राजनीति अभी भी काम से ज्यादा संवाद और संघर्ष की पटकथा लिखने में व्यस्त है।




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