"100 दिन में बदल देंगे बक्सर..." 9 महीने बाद जनता का पलटवार—'विधायक जी, क्या हुआ तेरा वादा?' चुनाव में जिस जासो, नदांव, कुल्हड़िया, सड़क और डुमरांव की टूटी सड़क पर जीत की इबारत लिखी गई थी, वही अब जनता के तंज का सबसे बड़ा हथियार बन गई है। सोशल मीडिया पर सवाल—'वादा था विकास का या सिर्फ चुनावी जुमलों का?'
बक्सर- राजनीति में जनता सब भूल जाती है... यह कहावत बक्सर में गलत साबित होती दिख रही है। विधानसभा चुनाव 2025 में जिन दो मुद्दों ने चुनाव की दिशा बदल दी थी, आज वही मुद्दे बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा और जदयू विधायक राहुल सिंह के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परेशानी बन गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पुराने चुनावी वीडियो और आज की बदहाल तस्वीरें एक साथ पोस्ट कर लिख रहे हैं—"क्या हुआ तेरा वादा...?"चुनावी वादे बनी गले की फांस!
बक्सर सदर में जासो-नदांव-कुल्हड़िया मुख्य पथ चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था। मंच से तत्कालीन उम्मीदवार आनंद मिश्रा ने दहाड़ते हुए कहा था—"100 दिन काफी हैं, बक्सर की सड़ांध खत्म कर दूंगा। जासो रोड को आरसीडी में बदलवाऊंगा। हर महीने जनता को रिपोर्ट कार्ड दूंगा। मैं घिघियाने वाला विधायक नहीं हूं, जो काम नहीं करेगा, वह बक्सर में नहीं रहेगा।"अब 100 दिन नहीं, पूरे 9 महीने बीत चुके हैं। सड़क आज भी गड्ढों में है और जनता सवालों के साथ सोशल मीडिया पर विधायक को घेर रही है।क्या कहते है बक्सर के शिक्षित युवा !?
पीएचडी शोधार्थी बिट्टू विश्वकर्मा कहते हैं,"विधायक जी, आपने कहा था 100 दिन काफी हैं। अब तो 270 दिन से ज्यादा हो गए। जासो रोड आज भी दर्द देती है। करोड़ों रुपये के चंदन के पेड़ चोरी हो गए, चोर नहीं पकड़े गए। जनता पूछ रही है—आपकी आवाज़ आखिर किन मुद्दों पर उठती है?" और कब अपना चुनावी वादा पूरा कीजियेगा ? एक बार आइये न हमारे इस सड़क पर !युवा गणितज्ञ संदीप ठाकुर कहते है!
गणितज्ञ संदीप ठाकुर का सवाल और तीखा है।"इटाढ़ी आरओबी का श्रेय लेने में सबसे आगे थे, लेकिन 96 घंटे में पुल टूट गया तो कई दिनों तक चुप्पी क्यों रही? डबल इंजन की सरकार है, फिर जनता की परेशानी का इंजन आखिर कब चलेगा?" आपके कार्यकाल में सामने आए डीटीओ कार्यालय शराब कांड, परिवहन विभाग की कथित घूसखोरी के वायरल ऑडियो, आखिर इन पर आपकी चुप्पी क्यो है? सूखे के दौरान किसानों की बदहाली को टैग कर लोग तंज कस रहे हैं कि "जनता खेत में जल रही है और नेता सुर्खियों में गिटार बजाते रहे।" क्या इसे नही कहेंगे खूबसूरत लोकतंत्र की बदसूरत तस्वीर !वही हाल अपना डुमराँव का भी है!
उधर डुमरांव में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। चुनाव परिणाम आने के कुछ घंटे बाद ही विधायक राहुल सिंह टूटी सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस समय अखबारों और सोशल मीडिया पर सुर्खियां थीं—"एक्शन में विधायक।" लेकिन नौ महीने बाद भी सड़क की तस्वीर नहीं बदली। अब लोग उसी फोटो के साथ लिख रहे हैं—"एक्शन कैमरे के लिए था या सड़क के लिए?"क्या कहते है राजनीति का जानकार !?
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस.एन. सिंह कहते हैं, "आज की राजनीति में घोषणाएं तेजी से होती हैं, लेकिन जनता अब वीडियो नहीं, परिणाम देख रही है। चुनावी भाषण अगर जमीन पर नहीं उतरते तो वही भाषण सबसे बड़ा राजनीतिक सबूत बन जाते हैं।" हर दिन हजारों लोग जासो-नदांव-कुल्हड़िया और डुमरांव की इन सड़कों से गुजरते हैं। हर गड्ढा मानो एक ही सवाल पूछता है—"वोट लेने से पहले जो जोश था, वह जीत के बाद कहां चला गया?"सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, सियासत की साख का है। क्योंकि जनता अब नेताओं के भाषण नहीं, उनके पुराने वीडियो और वर्तमान हालात का मिलान कर रही है। और यही कारण है कि बक्सर की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा गूंज रहा है सिर्फ एक गीत—"क्या हुआ तेरा वादा... वो कसम, वो इरादा?"





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