"आइए न... अपना बिहार में!" 26.40 करोड़ का आरओबी चार दिन भी नहीं टिका, मजबूरी में फुटओवरब्रिज पर ट्रॉली समेत ट्रैक्टर चढ़ा; थम गईं लोगों की सांसें ! आरओबी बंद, रेलवे फाटक पर ताला... पुलिस की मौजूदगी में एफओबी बना 'ट्रैक्टर मार्ग'; वीडियो वायरल होते ही जागा प्रशासन
बक्सर- बक्सर में विकास के दावों पर एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। इटाढ़ी रेलवे गुमटी के पास रेलवे के फुटओवरब्रिज पर एक ट्रैक्टर चालक ट्रॉली समेत ट्रैक्टर चढ़ाता नजर आया। यह नजारा देखकर मौके पर मौजूद लोगों की सांसें अटक गईं। कुछ लोगों ने इसे "बिहारी जुगाड़" कहा, तो अधिकांश ने इसे 26.40 करोड़ रुपये की परियोजना की नाकामी का जीवंत प्रमाण बताते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा—"आइए न... अपना बिहार में!"
जब फुटओवरब्रिज पर दौड़ने लगा ट्रैक्टर...
शुक्रवार की देर शाम मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के इटाढ़ी रेलवे गुमटी के समीप बने फुटओवरब्रिज पर अचानक ट्रॉली सहित ट्रैक्टर चढ़ने लगा। देखते ही देखते सैकड़ों लोग जुट गए। हर कोई मोबाइल कैमरे में इस हैरतअंगेज दृश्य को कैद करने लगा। लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल था—जिस पुल पर बाइक चढ़ाने से लोग डरते हैं, वहां ट्रॉली समेत ट्रैक्टर आखिर कैसे पहुंच गया? हालांकि पुल संकरा होने के कारण ट्रैक्टर बीच में ही फंस गया। कुछ देर तक अफरा-तफरी मची रही। बाद में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से ट्रैक्टर को पीछे उतारा गया, लेकिन चालक मौके से निकल गया।पुलिस देखती रही, चालक निकल गया!
घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब ट्रैक्टर फुटओवरब्रिज पर चढ़ रहा था, तब मौके पर जीआरपी के जवान मौजूद थे। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी ट्रैक्टर को पीछे कराने में मदद करते भी दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद चालक को मौके पर नहीं रोका गया। अब वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस चालक की तलाश में जुटी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—अगर कार्रवाई करनी ही थी, तो मौके पर क्यों नहीं हुई? क्या कैमरा चालू होने के बाद ही कानून जागता है?
अधिकारियों का जवाब!
मुफ्फसिल थाना पुलिस पोस्ट प्रभारी गुड्डू चौधरी और आरपीएफ पोस्ट प्रभारी कुंदन कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर ट्रैक्टर और चालक की पहचान की जा रही है। पहचान होते ही विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
26.40 करोड़ का पुल, 96 घंटे में दे गया जवाब!
इटाढ़ी रेलवे गुमटी के समीप 26 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज बड़े दावों के साथ शुरू किया गया था। लेकिन महज 96 घंटे के भीतर ही पुल के पाया संख्या-5 का स्लैब टूट गया और आवागमन बंद करना पड़ा। इसके साथ ही रेलवे फाटक भी बंद हो गया। तब से लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित है। स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज, किसान, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग रोज कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं। रेलवे फाटक खोलने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला।
अब यह तस्वीर केवल एक ट्रैक्टर चालक की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जहां करोड़ों रुपये की परियोजना चार दिन भी नहीं टिकती और जनता को फुटओवरब्रिज पर ट्रैक्टर चढ़ाकर रास्ता तलाशना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यही है—इस बदहाली की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?




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