- डीटीओ कार्यालय शराब कांड पर चला डीएम का डंडा! असंतोषजनक जवाब के बाद कार्रवाई की अनुशंसा, अब कई कर्मचारियों पर भी लटक सकती है तलवार !
बक्सर- जिला परिवहन कार्यालय में 14 मई को बरामद हुई दर्जनों भरी एवं खाली शराब की बोतलों के मामले में आखिरकार दो महीने बाद प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। जिलाधिकारी साहिला ने जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है। डीएम के इस फैसले के बाद डीटीओ कार्यालय में हड़कंप मच गया है।सरकारी कार्यालय में मिली थी शराब की खेप
14 मई को शराब की बड़ी खेप होने की सूचना पर नगर थाना पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने संयुक्त छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान सरकारी अलमारी से लेकर किचन रूम तक दर्जनों भरी एवं खाली शराब की बोतलें बरामद हुई थीं। सरकारी कार्यालय से शराब मिलने की इस घटना ने पूरे जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन अब डीएम की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
पहले सिपाही पर ठीकरा, फिर शराब को बताया गया नॉन-अल्कोहलिक
शराब बरामदगी के बाद जब पत्रकारों ने जिला परिवहन पदाधिकारी राजकुमार प्रसाद से सवाल किए थे, तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से परिवहन विभाग के एक सिपाही का नाम लेते हुए कहा था कि उसके द्वारा शराब सेवन की जानकारी मिली है और पुलिस अपना काम करेगी। इसके बावजूद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। कुछ ही दिनों बाद शराब को 'नॉन-अल्कोहलिक' बताए जाने की चर्चा भी शुरू हो गई। हालांकि, बक्सर के पुलिस कप्तान शुभम आर्य ने साफ कहा था कि बरामद सामग्री को जांच के लिए लैब भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डीएम को नहीं भाया डीटीओ का जवाब, अब बढ़ेगी कार्रवाई की आंच
शराब कांड के बाद जिलाधिकारी ने डीटीओ से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनका जवाब प्रशासन को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद डीएम ने विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा भेज दी है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई केवल डीटीओ तक सीमित नहीं रहेगी। जानकारों का कहना है कि जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे प्रकरण में कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस अनुशंसा पर कितना सख्त कदम उठाता है।



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