नकली मिठाई के भरोसे जनता को छोड़कर AC कमरों में असली मिठाई खाने वाले साहबों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई! गांव की गलियों से शहर के चौक-चौराहों तक सजा मिठाई का बाजार, लेकिन मिलावट जांचने वाले साहब आखिर कहां हैं फरार ? बहनों ने पूछा—“असली माजरा क्या है साहब?”
बक्सर— रक्षाबंधन का त्योहार है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व। गांव की गलियों से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक मिठाई की दुकानें सज चुकी हैं। कहीं रसगुल्ले की चमक है, कहीं पेड़े और बर्फी के काउंटर भरे पड़े हैं तो कहीं रंग-बिरंगी मिठाइयों से ग्राहकों को लुभाया जा रहा है। बहनें दूर-दराज से भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंची हैं और साथ में मिठाई भी खरीद रही हैं। लेकिन इस मिठास के बीच बक्सर की जनता के सामने एक कड़वा सवाल खड़ा है—आखिर त्योहार के इतने बड़े मौके पर मिठाइयों की शुद्धता जांचने वाले जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं?क्या बाजार में बिक रही मिठाइयों की जांच हुई?
क्या दुकानों से नमूने लिए गए? क्या मिलावट की जांच के लिए छापेमारी हुई? अगर हुई तो कार्रवाई कहां है? और अगर नहीं हुई तो आखिर क्यों?
“नकली मिठाई के भरोसे जनता को छोड़कर AC कमरों में असली मिठाई खाने वाले साहबों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई!”
बहन ने फिर तंज कसते हुए कहा—“नकली मिठाई के भरोसे जनता को छोड़कर AC कमरों में असली वाली मिठाई खाने वाले साहब लोगों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई! असली माजरा क्या है साहब?” यह महज एक व्यंग्य नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जिस पर आम आदमी त्योहार के दिनों में सबसे ज्यादा भरोसा करता है।
कहां है खाद्य विभाग?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहार के दौरान जिले के बाजारों में मिठाइयों की गुणवत्ता जांचने के लिए वैसी सक्रियता नजर नहीं आई, जिसकी उम्मीद की जाती है। लोगों का कहना है कि अगर जांच अभियान चलाया गया है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है? कितने नमूने लिए गए? कितने दुकानों की जांच हुई? कितने नमूने जांच के लिए भेजे गए? कितनों में गड़बड़ी मिली? इन सवालों का जवाब कौन देगा? जनता का सवाल सीधा है—क्या त्योहार के पहले बाजार की जांच करना खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी नहीं है? अगर जिम्मेदारी है तो कार्रवाई दिखाई क्यों नहीं देती?
क्या बक्सर में मिलावट का बाजार बेखौफ है?
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक त्योहार के मौके पर मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। हजारों परिवार मिठाई खरीदते हैं। लेकिन आम आदमी के पास यह पता लगाने का कोई साधन नहीं कि सामने रखी चमकदार मिठाई वास्तव में कितनी सुरक्षित है। उसके घर में शुद्धता जांचने का कोई मीटर नहीं लगा है। वह दुकानदार पर भरोसा करता है। वह पैकेट पर भरोसा करता है। और सबसे बढ़कर वह सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करता है।लेकिन अगर वही सरकारी व्यवस्था बाजार से गायब हो जाए तो आम आदमी आखिर किस पर भरोसा करे?
“मेरे घर शुद्धता जांचने का मीटर नहीं लगा है साहब!”
लोगों का कहना है कि मिठाई खरीदने वाला हर ग्राहक खाद्य विशेषज्ञ नहीं होता। वह न मिलावट पहचान सकता है और न ही मौके पर मिठाई की प्रयोगशाला जांच कर सकता है। वह सिर्फ इतना चाहता है कि जिस बाजार में वह अपने परिवार और बच्चों के लिए मिठाई खरीद रहा है, वहां सरकार की निगरानी जरूर हो। अगर विभाग समय रहते नमूने ले, जांच कराए और मिलावट करने वालों पर कार्रवाई करे तो लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा और गलत कारोबार करने वालों में डर भी रहेगा।
मिठाई खाने के बाद तबीयत बिगड़ी, उठे सवाल
जिले के रहने वाले युवक शिशिर कुमार ने बताया कि सिंडिकेट गोलंबर इलाके में एक मिठाई की दुकान पर काफी भीड़ थी। उन्होंने भी वहां से मिठाई खरीदी। उनका दावा है कि घर जाकर मिठाई खाने के करीब दो घंटे बाद उन्हें लूज मोशन की शिकायत होने लगी और डॉक्टर से दवा लेनी पड़ी। यह एक व्यक्ति का अनुभव है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है—अगर किसी मिठाई की गुणवत्ता पर शिकायत आती है तो उसकी जांच कौन करेगा? क्योंकि शिकायत के बाद भी अगर नमूना नहीं लिया जाएगा, जांच नहीं होगी और रिपोर्ट सामने नहीं आएगी तो मिलावट का सच सामने आएगा कैसे?
त्योहार जनता का, जोखिम भी जनता का?
रक्षाबंधन विश्वास का त्योहार है। बहन भाई को मिठाई खिलाती है, भाई बहन को मिठाई खिलाता है। घर में बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी मिठाई खाते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता केवल व्यापार का मामला नहीं है। यह लोगों के स्वास्थ्य और सरकारी जिम्मेदारी से जुड़ा सवाल है। त्योहार के बाद कार्रवाई की औपचारिक खबर से ज्यादा जरूरी है कि त्योहार के दौरान बाजार की निगरानी हो। दुकानों की जांच हो। मिठाइयों के नमूने लिए जाएं। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच हो। और मिलावट मिलने पर तत्काल कार्रवाई हो।
नकली मिठाई के भरोसे जनता को छोड़कर AC कमरों में असली मिठाई खाने वाले साहबों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई!
बक्सर की जनता अब सिर्फ यह नहीं पूछ रही कि मिठाई की दुकान पर भीड़ कितनी है। जनता पूछ रही है— मिठाई की गुणवत्ता जांचने वाला कौन है? नमूने लेने वाला कौन है? मिलावट रोकने वाला कौन है? और अगर कोई मिठाई खाकर बीमार पड़ गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी? बाजार में मिठाइयों के काउंटर चमक रहे हैं। दुकानदारों के चेहरे पर कारोबार की खुशी है। बहनें भाइयों के लिए मिठाई खरीद रही हैं। लेकिन इसी बीच खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी उतनी ही तेजी से उठ रहे हैं।
और बक्सर की जनता अपने अंदाज में जिम्मेदारों से कह रही है—“गांव की गलियों से शहर के चौक-चौराहों तक मिठाई का बाजार सजा है... जनता को नकली मिठाई के भरोसे छोड़कर AC कमरों में असली मिठाई खाने वाले साहब लोगों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई!” लेकिन साहब, बधाई के साथ एक सवाल भी है—आखिर बक्सर की जनता को शुद्ध मिठाई की गारंटी कौन देगा?

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