आनंद मिश्रा के पोस्टर से गायब अश्विनी चौबे, कार्यकर्ता असहज पोस्टर बना सियासत का आईना! चौबे समर्थकों ने कहा वरीय और बूथ स्तर के जनाधार वाले नेताओं को किनारे कर भाजपा में अपना नैरेटिव सेट करनेमे लगे है मिश्रा ! उनके सियासी जाल और पुलिसिया चाल को पहचानने में भाजपा नेताओं ने कर दी है चूक! पार्टी को आगे बढ़ाने में क्या है उनका योगदान ?
चुनावी कार्यालय के पोस्टर से गायब है अश्विनी कुमार चौबे ! समर्थकों ने लगाया गम्भीर आरोप
बक्सर — जिले में इस बार चुनावी पोस्टरों ने राजनीति से ज़्यादा कहानी कह दी है। भाजपा प्रत्याशी आनंद मिश्रा के चुनावी कार्यालय में लगे बैनर-पोस्टरों से पार्टी के फायर ब्रांड नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की तस्वीर गायब है। इस गायब चेहरे ने भाजपा के भीतर सियासी हलचल बढ़ा दी है। चौबे समर्थकों का आरोप है कि आनंद मिश्रा पार्टी के वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं को किनारे कर “अपना नैरेटिव” गढ़ रहे हैं। दर्शल आनन्द मिश्रा के चुनावी कार्यालय में सोमवार के दिन पहुँचे बीजेपी के फायरब्रांड नेता अश्विनी चौबे मंच पर आनन्द मिश्रा के समर्थन में आनन्द चालीसा पढ़ रहे थे! इसी दौरान जब उनके समर्थकों की नजर कार्यालय में लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग और पोस्टर पर पड़ी तो वह भी दंग रह गए ! देखते ही देखते यह चर्चा जंगल में लगी आग की तरह फैल गई! लगे हाथ विपक्ष ने चुटकी लेना शुरू कर दी!
पार्टी कार्यालय में पहुँचे स्थानीय लोगो ने किसी तंज
पोस्टर को लेकर पार्टी के अंदर छिड़ी इस सियासी जंग को लेकर स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा - “जो बक्सर को लंदन बनाने का दावा करते थे, अब खुद पोस्टर से लापता हैं!” वहीं कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में टिकट बंटवारे से लेकर प्रचार तक सब कुछ पैसे और प्रभाव के आधार पर तय हो रहा है। इसी कारण तो दिन रात पार्टी के लिए खड़ा रहने वाले जमीनी कार्यकर्ताओ को छोड़कर बागी को टिकट दे दिया गया!
ग्रामीणों ने उठाया सवाल !
“जब आईएएस आईपीएस ही नेता बनेंगे, तो कार्यकर्ता झंडा ही ढोएंगे?” युवा मतदाता मिश्रा से पूछ रहे हैं सवाल— “आपकी पार्टी 20 वर्षों से सत्ता में है, फिर बक्सर की यह दुर्दशा किसकी देन है?”
पार्टी के अंदरूनी बगावत को दबाने के लिए भाजपा ने उतारी बक्सर में स्टार प्रचारकों की फौज !
भीतरघात और असंतोष के बीच भाजपा ने स्थिति संभालने के लिए स्टार प्रचारकों की फौज उतार दी है। अमित शाह और नीतीश कुमार के बाद अब योगी आदित्यनाथ के आगमन की तैयारी चल रही है। वहीं, महागठबंधन के प्रत्याशी बिना किसी बड़े चेहरे के जनता के बीच जाकर संवाद बना रहे हैं।राजनीति के इस दौर में बक्सर का एक पोस्टर अब भाजपा की अंदरूनी खींचतान का आईना बन गया है — जहाँ सवाल सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि “विकास के असली चेहरे” का है।
गौरतलब है की शहर के ऐतिहासिक किला मैदान में अमित शाह की चुनावी रैली में कई पूंजीपतियों को मंच पर बैठा दिया गया ! इस चुनावी सभा से उठी विद्रोह की ज्वालामुखी अभी शांत भी नही हुआ था कि नीतीश कुमार के चुनावी सभा में पार्टी के वरीय नेताओ को दर्शक दीर्घा में जबकि युवाओं को मंच की कुर्सी पर बैठा दिया गया ! सीएम के जाते ही ज्वालामुखी बीच सड़क पर ही फट गई ! और चुनावी कार्यालय के सामने ही वरीय नेता एक दूसरे से भिंड गए,और दलाली कर पैसा उगाही करने का आरोप लगा दिया! इधर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के नेताओ को सुधर जाने का नसीहत देते हुए लिखा है! मंच पर ही जूता से मारेंगे ! बगावत के इस आग ने बक्सर भाजपा को कई टुकड़ो में फाड़ दिया है.



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