राहुल सिंह को चुनाव हराने के लिए किसने ली है टेंडर ! क्या पास रहने वाले नेताओं ने ही कर दी है भितरघात ? जदयू नेताओ के सियासी ड्रामे का वीडियो से खुलेगा कई राज !

 डुमराँव में जदयू का सियासी महाभारत !‘भीतरघात’ बना चुनावी ब्रांड, वफादारी पर उठा सवाल राहुल सिंह की डिजिटल सेना हुई ऑफलाइन! मंच की लिस्ट बदली, रिश्ते बिगड़े सीएम शो के बाद सड़क पर हुआ शोर!‘अजीत फोबिया’ ने जदयू नेताओ की उड़ा दी नींद !

बक्सर – चुनावी मौसम में डुमराँव विधानसभा सीट अब राजनीति की प्रयोगशाला बन चुकी है। यहां मुद्दे पीछे छूट चुके हैं, आगे सिर्फ “भीतरघात” का भूत और “अजीत फोबिया” का डर है। शनिवार को जो नज़ारा डुमराँव शहर में बीच सड़क पर देखने को मिला, उसने जदयू की सियासी स्क्रिप्ट को रियलिटी शो में बदल दिया है। पार्टी के सीनियर नेता बीच सड़क पर ऐसे भिड़े मानो चुनाव नहीं, प्रधानमंत्री के सिंहासन का युद्ध चल रहा हो।

जदयू नेताओ की आपसी जंग में कार्यकर्ताओ का जोश हुआ ठंडा !

चुनावी सभा से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निकलते ही, पार्टी के वरीय नेताओ के बीच छिड़ी सियासी जंग ने  विपक्ष को बैठे-बिठाए  मुद्दा दे दिया है. जिससे जदयू उम्मीदवार राहुल सिंह बिना डिजिटल सेना की सहायता के ही सुर्खियों में आ गए है.

राहुल की डिजिटल सेना ‘ऑफलाइन’ मोड में!

चुनावी सभा के मैदान में राहुल सिंह की  डिजिटल सेना अपने सेनापति की ब्रांडिंग के लिए मेहनत कर रहे थे। कैमरा-माइक के सामने उनकी टीम सक्रिय थी, लेकिन जनता के दिलों में नेटवर्क नहीं मिल रहा था। ऊपर से पार्टी के ही नेताओं ने सियासी मोबाइल का “रीस्टार्ट” बटन दबा दिया।“कौन है राहुल की सेना में अजीत का एजेंट?”यह सवाल अब हर नुक्कड़ पर पूछा जा रहा है। डिजिटल सैनिक चुप हैं, और जमीन पर सादगी की राजनीति करने वाले भाकपा माले विधायक अजीत कुशवाहा के समर्थक हर जगह सक्रिय दिख रहे हैं।

 किसने बदल दी मंच की लिस्ट !

25 नवम्बर को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले जदयू जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने बड़ी बारीकी से मंच की लिस्ट तैयार की थी। लेकिन जैसे ही सीएम पहुंचे, पूरी लिस्ट बदल दी गई। सीनियर नेता नीचे दर्शकदीर्घा में, और युवा नेता मंच पर तंज कसते दिखे। यह नज़ारा देखकर लगता था कि सीएम का कार्यक्रम नहीं, “सीएम बनाम टीम राहुल” का ड्रामा चल रहा हो। उधर उम्मीदवार की डिजिटल टीम मैदान में जनता को “मुद्दाविहीन संवाद” परोस रही थी—जिसमें बस कैमरा था, पर कंटेंट नही !

अंदरूनी घमासान का वायरल वीडियो !

इस राजनीतिक पटकथा में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब किसी पत्रकार ने पूरे सीन को कैमरे में कैद कर लिया। कुछ ही देर में यह वीडियो पार्टी समूहों में “न्यूज़ एक्सक्लूसिव” की तरह घूमने लगा। नतीजा—मनोरंजन तो जनता को मिला, लेकिन पार्टी का मनोबल “शेयर बाजार” की तरह धड़ाम से गिर गया। महीनों से चली आ रही डिजिटल मेहनत मिनटों में “फुस्स” हो गई।

तीन की लड़ाई, अब दो की टक्कर!

डुमराँव की इस सीट पर पहले मुकाबला तीन तरफा था—बीएसपी के पूर्व मंत्री ददन पहलवान, इंडिया गठबंधन के विधायक अजीत कुशवाहा, और एनडीए उम्मीदवार राहुल सिंह। लेकिन सियासी हवा अब साफ बता रही है कि मुकाबला दो के बीच सिमट चुका है। तीसरे उम्मीदवार की सोशल मीडिया से लेकर मैदान तक उपस्थिति अब “ठंड” पकड़ चुकी है। सूत्रों का दावा है कि मतदान से पहले कई “वीडियो बम” और “ऑडियो चैट” सोशल मीडिया पर गिरने वाले हैं—जो जदयू की चुनावी नाव को और डुबो सकते हैं।

जनता का मूड ‘सादगी बनाम दिखावा’!

जनता के बीच अब एक ही तुलना चल रही है“एक ओर कैमरा-माइक वाले नेता, दूसरी ओर सादगी से जनता के बीच रहने वाला विधायक।” लोग कहते हैं, “हम हवा में नहीं, हकीकत में राजनीति चाहते हैं।” यही लाइन अब राहुल की डिजिटल आंधी के लिए सबसे बड़ा विरोधी नारा बन गई है। नतीजा जो भी हो, सबक बड़ा होगा ! डुमराँव की यह जंग शायद बिहार की राजनीति के लिए नया सबक दे, डिजिटल ब्रांडिंग से चुनाव नहीं जीते जाते, भरोसे की ब्रांडिंग जरूरी है। और यह भरोसा फिलहाल जदयू की दीवारों में दरार बन चुका है। भीतरघात की आग में जलती पार्टी अब इस कोशिश में है कि राख से भी कुछ वोट बच जाएं!

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