डुमराँव में ‘अजीत फोबिया’ का कहर! एनडीए में मची हलचल — “हवाबाज़ी बनाम हकीकत” की जंग तेज़ ! सपने में भी राहुल सिंह को डरा रहा है वर्तमान विधायक का कार्य !

 डुमराँव में ‘अजीत फोबिया’ का कहर! एनडीए में मची हलचल — “हवाबाज़ी बनाम हकीकत” की जंग तेज़ ! सपने में भी राहुल सिंह को डरा रहा है वर्तमान विधायक का कार्य !

बक्सर — जिले की 201 डुमराँव विधानसभा सीट इन दिनों सियासी तापमान से तप रही है। एक तरफ एनडीए के नेता डिजिटल रणभूमि में वीडियो, रील और प्रचार पोस्टों की बरसात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन के विधायक अजीत कुशवाहा ने ऐसा बयान दागा कि एनडीए खेमे में खलबली मच गई। कुशवाहा बोले — “एनडीए के नेता सपने में भी मेरे काम से डरते हैं, अब तो उनका पूरा दिन मेरे नाम का जाप करने में बीतता है।”उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं अपने दिन की शुरुआत कैमरा, माइक और रील से नहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों से करता हूँ। अफसोस, विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा — बस ‘अजीत फोबिया’ में जी रहे हैं।” उनका निशाना साफ तौर पर जदयू प्रत्याशी राहुल सिंह पर था। कुशवाहा बोले — “अगर वे सोशल मीडिया पर पैसा उड़ाने के बजाय गरीबों की झोपड़ी में जाकर उनकी तकलीफ़ सुनते, तो राजनीति का असली मतलब समझते। फॉलोअर वोट नहीं देते — जनता उस नेता को चाहती है जो उनके साथ खड़ा हो।”

वर्तमान विधायक के इस बयान से एनडीए खेमे में खामोशी !

अजित कुशवाहा विधायक

डुमराँव की सियासत में यह बयान बिजली की तरह फैला। एनडीए के गलियारों में सन्नाटा और चर्चा दोनों है। अजीत कुशवाहा वही विधायक हैं जिन्होंने पिछले चुनाव में संगठन, संघर्ष और सादगी के बल पर जनता का दिल जीता था। इस बार उनके निशाने पर सिर्फ जदयू प्रत्याशी ही नहीं, पूरा एनडीए गठबंधन है। उन्होंने कहा — “बशिष्ठ बाबू ने जिस सामाजिक न्याय की विरासत को सींचा, एनडीए ने उसे त्यागकर पूंजीवादी सोच के आगे घुटने टेक दिए। टिकट मेहनतकशों से छीनकर पूंजीवालों को दे दिया गया।”

क्या कहते है राजनीति के जानकार !

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो, कुशवाहा का यह बयान रणनीतिक चाल भी है और जनभावना से जुड़ा संदेश भी। उन्होंने विकास की राजनीति को जातीय और पूंजीगत समीकरणों से ऊपर उठाने की कोशिश की है। वहीं, एनडीए खेमे की ‘डिजिटल सेना’ उनके बयान को “भ्रम फैलाने वाली राजनीति” बता रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर “अजीत फोबिया” का असर साफ दिख रहा है।


गौरतलब है कि डुमराँव की लड़ाई “हवाबाज़ी बनाम हकीकत” की बन चुकी है। एक ओर कैमरा-फ्रेंडली चेहरे हैं जो हर दिन रील में विकास दिखाते हैं, दूसरी ओर अजीत कुशवाहा हैं  जो जनता के बीच जाकर सवाल पूछते हैं। अब देखना यह है कि डुमराँव की जनता वोट “सोशल मीडिया की चमक” पर देगी या “जमीनी जनसेवा” पर। फिलहाल इतना तय है की, अजीत कुशवाहा के शब्दों के तीर ने एनडीए की सियासी ढाल को भेद दिया है। जदयू प्रत्याशी राहुल सिंह ,अजीत कुशवाहा के चक्रव्यूह में पूरी फंस चुके है जिसका झलक उनके ही बयानों में साफ दिखाई और सुनाई दे रहा है.

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