बक्सर के चुनावी मंच पर अमित शाह की शंखध्वनि— मंच पर तालियाँ कम, तापमान ज़्यादा!”भाषण पुराना, जोश नया, “जंगलराज के डर में एनडीए का ‘शो ऑफ स्ट्रेंथ’, मंच पर ही दिखी असमानता की झलक!”
बक्सर - शहर के ऐतिहासिक किला मैदान में शुक्रवार को सियासी ‘दंगल’ सजा — मंच पर एनडीए के पांच योद्धा मौजूद रहे! लेकिन युद्ध की पुकार सिर्फ़ एक के लिए! बार- बार की गई! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जिन्हें भाजपा का “चाणक्य” कहा जाता है, एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में जब मंच पर पहुंचे तो लगता था जैसे सियासी सूर्य खुद चुनावी रणभूमि में उतर आया हो। लेकिन भाषण सुनने के बाद लगा कि यह सियासी तापमान तो शायद पुराने “स्क्रिप्ट” से ही गर्माया गया है।
25 मिनट तक अमित शाह ने किया जनता को सम्बोधित !
अमित शाह ने लगभग 25 मिनट तक जनता को संबोधित किया। शुरुआत छठ मैया से आशीर्वाद मांगने से हुई—“हे छठ मैया, बिहार को जंगलराज वालों से बचाना।” पर मंच के पीछे खड़े कई प्रत्याशियों के चेहरे बता रहे थे कि इस बार चिंता सिर्फ़ जंगलराज की नहीं, सीटों के “सफाए” की भी है। 2020 में चारों विधानसभा सीटें और लोकसभा की हार का घाव अभी ताज़ा है। शायद इसलिए अमित शाह का भाषण में विपक्ष, जंगलराज, जम्मू-कश्मीर, धारा 370, राम मंदिर, जानकी मंदिर पर ही टिका हुआ था. जो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव एवं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मुद्दा था!
मंच पर प्रत्याशियों की असहज मुस्कानें !
जब शाह ने बक्सर के भाजपा प्रत्याशी आनंद मिश्रा का नाम पाँच बार लिया, तब बाकी तीन प्रत्याशी—जदयू के संतोष निराला, राहुल सिंह और चिराग पासवान की पार्टी के हुलास पांडे—के चेहरों पर मजबूर मुस्कान थी। मानो मंच पर भी सीट शेयरिंग की असमानता का ट्रेलर चल रहा हो। यह वही मंच था जहाँ एक-एक नाम के साथ पार्टी का भविष्य जुड़ा था, लेकिन जिक्र सिर्फ़ एक का हो रहा था। शायद “ब्रांडिंग पॉलिटिक्स” अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, मंच पर भी इसका असर साफ दिखा।
पुराने वादे, नया पैकेजिंग!
शाह ने अपनी रैली में जो योजनाएं गिनाईं — वही सभी योजनाएं भी पुरानी थी। चौसा का पावर प्लांट, गंग ब्रिज, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान योजना — ये सब 2020 की रैलियों में भी सुनी जा चुकी हैं। जनता की जुबान पर सवाल था—“भाषण नया कब मिलेगा?” राजनीतिक जानकारों की माने तो यह रैली जनता की भावना टटोलने से ज़्यादा “मनोबल बढ़ाने” की कवायद थी, ताकि एनडीए कार्यकर्ताओं को यह भरोसा रहे कि “खेल अभी बाकी है!”
लालू पर निशाना, पर सवाल एनडीए पर !
शाह ने लालू-राहुल गठजोड़ को “जंगलराज की कंपनी” बताया, लेकिन जनता के मन में सवाल यह भी था कि क्या भाजपा-जदयू के बीच पुरानी खटास क्या इस बार भी असर नहीं डालेगी? क्योकि मंच से बार बार-एक ही प्रत्याशी के लिए ताली बजवाने का संकेत भी साफ था.
सियासी समीकरण और ‘बक्सर मॉडल’
जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र ब्रह्मपुर, बक्सर, डुमराँव और राजपुर—में मुकाबला इस बार त्रिकोणीय दिख रहा है। एनडीए की ओर से भाजपा, जदयू और लोजपा (रामविलास) एक साथ मैदान में हैं, जबकि इंडिया गठबंधन ने जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ अपना मोर्चा मजबूत किया है। अमित शाह की रैली से एनडीए की ताकत का प्रदर्शन तो हुआ, लेकिन स्थानीय नेतृत्व की बेचैनी और संगठनात्मक दूरी भी उजागर हुई।
गौरतलब है कि अमित शाह की बक्सर रैली ने यह तो साबित कर दिया कि भाजपा का चुनावी इंजन अब फुल स्पीड में है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुरानी स्क्रिप्ट और दोहराए गए वादों के सहारे मतदाता को फिर से लुभाया जा सकता है? एनडीए के मंच पर जो तालियाँ बजीं, वह उत्साह की थीं या मजबूरी की—यह 14 नवंबर को मतगणना के दिन तय होगा।


0 Comments