जनसुराज ने खेला निर्णायक खेल!राजनीतिक शतरंज में त्रिकोणीय मुकाबले होने की बक्सर में दिखने लगी आसार !

 तथागत हर्षवर्धन की धमाकेदार एंट्री से बढ़ा बक्सर का सियासी तापमान! सदर सीट पर जन सुराज ने तथागत हर्षवर्धन को उम्मीदवार घोषित कर बढ़ाई दोनों गठबंधन के नेताओ की बेचैनी !इंडिया और एनडीए गठबंधन के नेता है अभी तक खामोश ! जनसुराज ने खेला निर्णायक खेल!राजनीतिक शतरंज में त्रिकोणीय मुकाबले होने की बक्सर में दिखने लगी आसार !

तथागत हर्षवर्धन जनसुराज उम्मीदवार

बक्सर- 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद, राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन गुजर जाने के बाद भी दोनो गठबन्धन के नेताओ ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नही किया है. जिसको लेकर कार्यकर्ताओ में भी मायूसी है. इस खामोशी के बीच, ‘तीसरी महाशक्ति’ के रूप में उभरे जनसुराज ने एक साहसिक कदम उठाया है: बक्सर सदर विधानसभा सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री के. के. तिवारी के पुत्र और कांग्रेस के पूर्व जिले अध्यक्ष तथागत हर्षवर्धन को अपना उम्मीदवार घोषित किया.यह घोषणा न सिर्फ एक प्रतीकात्मक दांव है, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है. बक्सर सदर सीट सिर्फ जिले की ही नहीं, बल्कि उससे सटे उत्तर प्रदेश के विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों पर भी असर डालती है. इसलिए इस सीट की जीत-हार का प्रभाव व्यापक रहेगा.

 दबाव में है इंडिया और एनडीए गठबंधन के नेता !

इंडिया एवं एनडीए गठबंधन के नेता अभी तक इस सीट पर अपने उम्मीदवारों का नाम घोषित नही किया है. राजनीति के जानकारों की माने तो दोनों गठबंधन के नेता अभी  जातीय संतुलन, प्रत्याशी चयन विवाद एवं रणनीति बनाने में ही उलझे हुए है. इस कमजोरी का भरपूर फायदा उठाते हुए जन सुराज ने तथागत हर्षवर्धन को मैदान में उतारकर न सिर्फ कांग्रेस के कुछ विरोधियों को विचलित किया है बल्कि एनडीए औऱ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों पर दबाव भी बढ़ा दिया है.

दोनों गठबंधन के नेताओ ने बक्सर को बनाया बीमारू जिला !

उम्मीदवार के नाम की घोषणा होने के बाद तथागत हर्षवर्धन ने प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि,पिछले तीन दशकों में सत्ता की मुख्य धुरी बन कर रहने वाले नेताओं ने बक्सर को ‘बीमारू जिला’ बना दिया है. वे विशेष रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क- की बदहाली को मुद्दा बनाते हुए कहते हैं कि “अगर अस्पताल–स्कूल बीमार हों, तो जनता का विकास कैसे संभव है?”। उन्होंने भरोसा जताया कि जनसुराज का “पांच संकल्प” जो  सार्वजनिक रूप से घोषित है. हमारी पार्टी उसी विजन को लेकर चुनावी मैदान में अकेले खड़ी है. और

इस बार पूरे बिहार में क्लीन स्वीप करके जनसुराज की सरकार बनने जा रही है.

शुरू हुई जनसुराज का राजनीतिक  परीक्षा !

जनसुराज जिसे प्रशांत किशोर ने अक्टूबर 2024 में एक राजनीतिक परियोजना के रूप में लॉन्च किया था, वह राजनीतिक पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रदेश के दोनों प्रमुख गठबंधनों को चुनौती देने के लिए पूरी तरह से तैयार दिखाई दे रही है. और बक्सर सदर पर यह दांव उन्हीं इरादों की परीक्षा है. विपक्ष और सत्तारूढ़ों दोनों के लिए जनसुराज एक त्रिकोणीय खेमे के रूप में सामने दिखाई देने लगी है.

 गौरतलब है कि तथागत हर्षवर्धन का कांग्रेस से संबंध और कांग्रेस की स्थानीय जड़ों का असर जनसुराज को सफलता दिला सकता है. अगर जनसुराज की पहचान “स्वच्छ राजनीति, जनता की आवाज़” के रूप में स्थापित हो जाए, तो उनका यह कदम बिहार विधानसभा चुनाव को सिर्फ दो-धुरी नहीं, बल्कि तीसरे-धुरी का युद्ध बना देगा !

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