राजपुर में उठी बदलाव की आंधी! कांग्रेस विधायक पर जनता का गुस्सा, संतोष निराला बने उम्मीद की किरण — “अबकी बार हिसाब होगा, हिस्ट्री नहीं”!

 राजपुर में उठी बदलाव की आंधी! कांग्रेस विधायक पर जनता का गुस्सा, संतोष निराला बने उम्मीद की किरण — “अबकी बार हिसाब होगा, हिस्ट्री नहीं”!

बक्सर- जिले के 202 (सुरक्षित ) राजपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत इस वक्त गर्म है . हवा बदल रही है, और जनता इस बार मूड में दिख रही है. कभी “जनता का सेवक” कहे जाने वाले कांग्रेस विधायक विश्वनाथ राम अब जनता के गुस्से का सामना कर रहे हैं. गांव-गांव में एक ही चर्चा है — “विकास नहीं, विकास के नाम पर बस प्रचार हुआ.”

मतदाताओ के विरोध से असहज है नेता जी सेल्फी के सहारे सहज होने का कर रहे है दिखावा !

ग्रामीण इलाकों में मतदाता खुलेआम नाराजगी जता रहे हैं. जिससे नेता जी पूरी तरह से असहज हो गए है. लाखो खर्च कर हायर की गई विधायक जी का डिजिटल सेना , सोशल मीडिया में उनकी सेल्फी डालकर सहज दिखाने का प्रयास में लगे हुए है. लोगों का कहना है कि विधायक ने पांच साल पहले “विकास” का जो सपना दिखाया था, वो अब केवल कागजों और सोशल मीडिया की पोस्ट तक सीमित रह गया. अस्पतालों में सुविधा का अभाव, टूटी सड़कें और बेरोज़गारी की मार से जनता परेशान है. कई ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा . “हमारे गांव में बीमार को चार पहिया नहीं, चारपाई पर ले जाना पड़ता है, यही है विधायक का विकास!”

कागजों में विकास, जमीन पर मायूसी”

ग्रामीणों ने कहा विधयाक की सूरत भी नही देखे है ग्रामीण !

राजपुर के मतदाताओं का कहना है कि विश्वनाथ राम कागजों में विकास दिखाने में माहिर हो गए हैं. सरकारी फाइलों में योजनाओं की भरमार है, लेकिन धरातल पर न सड़कें बनीं, न स्वास्थ्य केंद्र सुधरे. सोशल मीडिया पर प्रचार और तस्वीरों से ही विकास की झलक दिखा दी गई. लोगों ने विधायक पर तंज कसते हुए कहा कि  “विकास विधायक के फेसबुक पर है, गांव में नहीं”

जुमलों से नही जिंदा रहेगी जनता !

इन सबके बीच, मौजूदा विधायक अब गांव-गांव जाकर माफी मांग रहे हैं और फिर से वादे कर रहे हैं, मगर जनता अब उनके वादों में भरोसा नहीं दिखा रही. एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, “काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती... इस बार जनता हिसाब करेगी.” राजपुर की राजनीति में इन दिनों पूर्व मंत्री संतोष निराला फिर से चर्चा में हैं. उनके समर्थक गांव-गांव में सक्रिय हैं और लोगों को उनके कार्यकाल की याद दिला रहे हैं.

ग्रामीण इलाके के मतदाता

लोगों के अनुसार निराला ने अपने समय में सड़कों का जाल बिछाया, शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया और थानों को आधुनिक बनाया. हार के बाद भी जनता के बीच बने रहना उनकी सबसे बड़ी पूंजी है. यही वजह है कि युवा मतदाता भी इस बार “निराला की वापसी” की बात खुलकर कर रहे है.

सियासी इतिहास और जनता का गुस्सा

राजपुर का राजनीतिक इतिहास हमेशा उथल-पुथल से भरा रहा है. 90 के दशक में यह इलाका अपराध और भय का केंद्र था. सूर्यास्त के बाद थाने बंद हो जाते थे, लोग डर से घरों में कैद रहते थे. 2005 के बाद सत्ता बदली, और विकास की नई शुरुआत हुई. संतोष निराला ने अपने कार्यकाल में इस क्षेत्र को भयमुक्त कर विकास के रास्ते पर लाने की कोशिश की.इसके उलट मौजूदा विधायक के कार्यकाल में जनता को निराशा ही मिली. न जनसंपर्क, न सुनवाई, न कोई ठोस विकास— जनता अब कह रही है, “वो लौटेंगे जिन्होंने काम किया, न कि वो जो फोटो खिंचवाते हैं.”

अधूरे वादे और खोया भरोसा

2020 के चुनाव में विश्वनाथ राम ने! कहा था कि अगर धनसोई को प्रखंड का दर्जा नहीं मिला, तो वे दोबारा वोट मांगने नहीं आएंगे. लेकिन पांच साल बाद वही नेता फिर वोट मांगते दिखाई दे रहे हैं. जनता अब पूछ रही है “क्या हुआ तेरा वादा?”स्थानीय लोग ने तंज कसते हुए कहा “नेता जी ने विकास का नक्शा नहीं, बहाने का मॉडल बनाया है.”

युवाओं की नई सोच — “सेल्फी नहीं, सेवा चाहिए”

राजपुर के युवा इस बार बदलाव के झंडाबरदार बने हुए हैं. कॉलेजों और चाय की दुकानों पर एक ही बात चल रही है — “अबकी बार सेवा वाला नेता चाहिए, सेल्फी वाला नहीं.”युवाओं का कहना है कि इस बार वोट किसी पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि काम के आधार पर पड़ेगा.जनता ने तय कर लिया है रुख

राजपुर की गलियों में अब चर्चा साफ है “अबकी बार हिसाब होगा.”

मतदाताओं का मानना है कि चमकदार तस्वीरें नहीं, टूटी सड़कें और बेरोज़गारी असली सच्चाई हैं. जनता अब विकास का असली सबूत मांग रही है, और यही वजह है कि इस बार हवा किसी और दिशा में बहती दिख रही है. गौरतलब है कि राजपुर की जनता अब इतिहास नहीं, हिसाब लिखने जा रही है — और इस बार फैसला विकास पर नहीं, ‘विकास के सच’ पर होगा.

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