गजबे है बिहार का बक्सर जिला ! रसूखदार नेता जी का नाम सुनते ही “ अफसरों की सांसें देती हैं ब्रेक!”होर्डिंग टैक्स वसूलना तो दूर की बात नाम सुनते ही शरीर में हो जाती है कम्पन !“सरकारी जमीन पर महल, गरीबों की झोपड़ी पर कहर !
बक्सर- जिले के बक्सर एवं डुमराँव अनुमंडल में इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच प्रशासन का बुल्डोजर गरीबों की झोपड़ी पर ऐसा कहर बरपा रहा है, मानो गर्मी निकालने का एकमात्र उपाय वही हो। लेकिन जैसे ही बात रसूखदारों की आती है, वही बुल्डोजर अचानक ठंडा पड़ जाता है, ब्रेक जाम हो जाते हैं और अफसरों की सांसें गले में अटककर “नेता जी ज़िंदाबाद” का नारा लगाने को मजबूर हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बक्सर में बुल्डोजर गरीबों को पहचानता है और सरकारी जमीन पर खड़े महलों को देखकर आंखें मूंद लेता है। यह भारत का पहला बुल्डोजर है जिसे सेलेक्टिव विजन की सरकारी सुविधा प्राप्त है।
नेता जी का नाम = प्रशासनिक कम्पन !
एनडीए शासन में गरीबों की झोपड़ी पर कार्रवाई करना प्रशासन के लिए मानो फिटनेस टेस्ट हो—“आज कितनी झोपड़ियाँ गिरी?” “साहब! पांच।” “अच्छा, बहुत बढ़िया! फोटो खिंचवा लो। लेकिन जैसे ही शहर में रसूखदार नेता जी का नाम आता है, अफसरों के हाथ में पकड़ा नोटिस उड़कर दूर चला जाता है और गले में फंसी सांस एक मीटिंग रूम से दूसरे में घूमती रहती है। नगर परिषद के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “नेता जी के प्रतिष्ठान पर होर्डिंग टैक्स वसूली? अरे भाई, पहले अपनी जान की इंश्योरेंस करा लीजिए!” उन्होंने बताया कि नेता जी ने अगर गलती से भी छींक दिया तो बड़े से बड़ा अधिकारी रातों-रात तबादला होने के डर से छाता लेकर उनके घर पहुंच जाता है“सर! सर्दी लग गई थी क्या?”
रसूखदारों का ‘स्वर्ग’—बक्सर !
शहर में सरकारी जमीनों पर बने गगनचुंबी भवन किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं। सरकारी तालाब, विश्राम सरोवर, ताड़का नाला, नहर से लेकर पशुमेला , चर्च तक… जहां जगह मिली, वहां रसूखदारों ने कब्जा कर अपनी विरासत छोड़ दी। लेकिन प्रशासन की नजर? सिर्फ घास-फूस की झोपड़ी पर जाती है क्योंकि उनमें आवाज नहीं होती और मालिक गरीब होता है।
प्रशासन को खुली चुनौती देते रसूखदार!
इस शहर में सरकारी जमीन पर महल खड़े कर हजारों करोड़ की संपत्ति वाले लोग प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं—“अगर हिम्मत है तो नोटिस देकर दिखाओ!”और अधिकारी साहब दूर से ही जवाब देते हैं— “जी सर, दूर से ही देख लिया… आता हूं गरीबों की तरफ से ! आप ने तो सही जगह इमारत बनाई है!
महात्मा गांधी बाजार का मिटता इतिहास !
बक्सर का महात्मा गांधी बाजार कभी बिहार ही नहीं, यूपी की अर्थव्यवस्था को भी सीधी पटरी देता था। लेकिन समय ने करवट ली और बाजार ने आंखें बंद कर लीं।सरकारी जमीन पर कब्जा कर बड़े-बड़े कॉम्प्लेक्स बन गए, विभाग ने सुविधा उपलब्ध करा दी, और आज उस बाजार का अस्तित्व मिटने की कगार पर है।एक सरकारी कर्मी ने तंज कसते हुए कहा—“यहां मंडी बचाने से ज्यादा जरूरी कमजोरों पर ताकत आजमाना है, तभी तो रिपोर्ट कार्ड में स्टार मिलता है।”
बक्सर का नया ‘विकास मॉडल’
गरीब = बुल्डोजर का टेस्टिंग ग्राउंड?
रसूखदार नेता = सरकारी जमीन के ब्रांड एंबेसडर!
अधिकारी = फोन आने पर कांपता हुआ वाईफाई
होर्डिंग टैक्स = सिर्फ कमजोरों के लिए
अतिक्रमण = वही जो गरीब कर दें
बाकी सब = विकास योजनाओं का हिस्सा
गौरतलब है कि बक्सर नगर परिषद क्षेत्र में एक रसूख वाले नेता जी ने आज तक नगर परिषद कार्यलय को होर्डिंग टैक्स नही दिया है! कार्यालय कर्मचारी की माने तो साहब की रसूख को देखते हुए विभाग के कोई भी अधिकारी आज तक उनके दरवाजे पर जाने की हिमाकत नही की! और ना ही नेता जी ने कभी टैक्स देना उचित समझा !

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