रील बनाम रियल वर्क की जंग में बक्सर की राजनीति! सांसद के बयान पर विधायक का पुलिसिया पलटवार! पूर्व आईपीएस का तेवर:

 रील बनाम रियल वर्क की जंग में बक्सर की राजनीति! सांसद के बयान पर विधायक का पुलिसिया पलटवार! पूर्व आईपीएस का तेवर: “जंगल राज लौटने नहीं दूंगा!” चंदन कांड से लेकर कमीशन सिस्टम तक, सियासत गरम! बक्सर में जुबानी जंग नहीं, सीधी सियासी टक्कर! पूर्व आईपीएस सदर विधायक आनन्द मिश्रा के जवाब से बक्सर की राजनीति में उबाल !

बक्सर- बक्सर की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। सदर विधायक एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्रा ने राजद सांसद सुधाकर सिंह के बयान पर ऐसा करारा और पुलिसिया अंदाज में पलटवार किया है कि जिले की राजनीति में भूचाल आ गया है। उनके बयान न सिर्फ तीखे थे, बल्कि सीधे तौर पर राजद के पुराने शासनकाल और मौजूदा विपक्षी राजनीति पर सवाल खड़े करते नजर आए। पत्रकारों से बातचीत में आनन्द मिश्रा ने सांसद द्वारा उन्हें “प्रवासी” कहे जाने पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि अगर वह प्रवासी बने तो इसके लिए 2005 से पहले का वही दौर जिम्मेदार था, जिसे बिहार की जनता “जंगल राज” के नाम से जानती है। 

जंगलराज के डर से बना था प्रवासी !

मिश्रा ने कहा कि उस समय बिहार की स्थिति ऐसी कर दी गई थी कि उनकी पीढ़ी के हजारों युवाओं को रोज़गार और सुरक्षित भविष्य के लिए राज्य छोड़ना पड़ा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अब जब मैं वापस आया हूं, तो यह सुनिश्चित करने आया हूं कि बिहार में दोबारा जंगल राज न लौटे और युवाओं को पलायन न करना पड़े।”

 रील बनाम रियल की राजनीति !

राजद सांसद द्वारा “केवल रील बनाने” के आरोप पर भी आनन्द मिश्रा ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर सांसद महोदय युवाओं का अपमान कर रहे हैं। मिश्रा ने कहा, “तेजस्वी यादव मरीन ड्राइव पर नाचते हुए रील बनाते हैं, जबकि मेरे काम को देखकर युवाओं ने रील बनाई है। फर्क साफ है—एक तरफ दिखावा, दूसरी तरफ ज़मीन पर काम।” उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना होता है, लेकिन यहां हालात यह हैं कि विपक्ष सरकार के काम का भी श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है। “काम तो विपक्ष को करना नहीं है, लेकिन सरकार के काम को अपना बताने में उन्हें देर नहीं लगती,”

एफआईआर और सिस्टम पर तंज!

आनन्द मिश्रा ने सांसद के बयानों को “ज्ञान के अभाव में दिया गया” बयान बताते हुए कहा कि, सांसद को यह भी पता नहीं है कि एफआईआर कौन कराता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज कराना विधायक का काम नहीं, बल्कि विभाग और पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “एक नेता की नेतागिरी और एक अधिकारी की नेतागिरी में यही फर्क होता है।” पूर्व आईपीएस ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जिन लोगों का कमीशन सिस्टम बंद कराया है, वही लोग अब बौखलाकर अनर्गल बयान दे रहे हैं। “बिल से बिलबिलाकर सब बाहर निकल रहे हैं,”

चंदन कांड पर बड़ा बयान।

नाथ बाबा मंदिर से जुड़े चर्चित चंदन चोरी मामले पर भी आनन्द मिश्रा ने बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि चंदन की लकड़ी फेंके जाने में उनका कोई व्यक्तिगत श्रेय नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरीय नेता और बैकुंठपुर से विधायक मिथलेश तिवारी के बक्सर पहुंचने और उनके सख्त बयान के बाद चोर घबरा गए और चंदन की लकड़ी फेंक दी। “यह भैया का देन है, मेरा नहीं,” कहकर उन्होंने श्रेय पार्टी नेतृत्व को दिया। जिसका राजनीतिक संदेश साफ था!

हम आपको बताते चले कि आनन्द मिश्रा का यह बयान सिर्फ एक जवाब नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह बयानबाजी की राजनीति में नहीं, बल्कि काम की राजनीति में विश्वास रखते हैं और ऐसे लोगों पर दोबारा बयान नहीं देंगे। फिलहाल, उनके इस पुलिसिया अंदाज वाले जवाब ने बक्सर की राजनीति को और तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजद सांसद सुधाकर सिंह इस पलटवार पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और यह सियासी टकराव आगे किस मोड़ पर जाता

Post a Comment

0 Comments