बक्सर का ‘चन्दन चोर’ कौन एसडीएम आवास के रास्ते चोरी, पुलिस के लिए पहेली, 120 घंटे बाद लकड़ी बरामद, चोर अब भी फरार मंदिर, माफिया या अंदरूनी खेल? जांच के घेरे में सफ़ेदपोश!
बक्सर- जिले के नगर थाना क्षेत्र में 22 दिसम्बर की रात हुई चन्दन चोरी अब सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और रसूखदारों की भूमिका पर बड़ा सवाल बन चुकी है। प्रसिद्ध नाथ बाबा मंदिर परिसर से दो कीमती सफेद चन्दन के पेड़ काटकर चोरी कर लिए गए, वह भी एसडीएम आवास के रास्ते से, 15 फीट ऊंची दीवार फांदकर। हैरानी की बात यह है कि घटना के 120 घंटे बाद पुलिस ने गंगा तट से चन्दन की लकड़ी तो बरामद कर ली, लेकिन चोर अब तक गिरफ्त से बाहर हैं।
चर्चाओं का बाजार गर्म !
घटना के बाद से बक्सर की चाय दुकानों, चौराहों और गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—आखिर ऐसा कौन सा चोर है, जो प्रशासन की नाक के नीचे वारदात कर गया और पुलिस को अब तक चकमा दे रहा है? कोई इसे “वीआईपी चोर” बता रहा है तो कोई बड़े चन्दन माफिया का खेल। चर्चाओं में सच्चाई कम, संदेह ज्यादा है, लेकिन संदेह के ये धागे सीधे सत्ता, सुरक्षा और सिस्टम से जुड़ते दिख रहे हैं।
चोरी मामले में कौन है बेहद करीबी चोर !
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि चोरी का रास्ता एसडीएम आवास की ओर से बताया जा रहा है। आम लोगों के लिए यह बात पचाना मुश्किल है कि अनुमंडल के सबसे बड़े अधिकारी के आवास के इतने करीब, बिना किसी भनक के, इतनी बड़ी चोरी हो जाए। क्या सुरक्षा में चूक हुई, या चूक जानबूझकर की गई? यह सवाल अब जांच का केंद्र बनता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति की निशानदेही पर चन्दन की लकड़ी बरामद हुई है, वह फिलहाल फरार है। अधिकारियों के मुताबिक, इस चोरी में “बेहद करीबी लोग” शामिल हो सकते हैं और जांच परत-दर-परत आगे बढ़ रही है। यह बयान अपने आप में कई संकेत देता है—क्या मंदिर से जुड़े लोग शक के घेरे में हैं? या फिर चोरी के पीछे कोई ऐसा नेटवर्क है, जिसकी पहुंच स्थानीय स्तर से ऊपर तक है?
किसके भरोसे चोरो ने की दुस्साहस ?
सूत्रों की मानें तो नाथ बाबा मंदिर परिसर से जुड़ा एक व्यक्ति भी जांच के दायरे में है। हालांकि पुलिस इस पर खुलकर कुछ कहने से बच रही है। सवाल यह भी है कि अगर लकड़ी गंगा तट पर छिपाई गई थी, तो क्या यह पहले से तय योजना का हिस्सा था? क्या चोरों को भरोसा था कि गिरफ्तारी नहीं होगी, या फिर किसी संरक्षण के भरोसे यह दुस्साहस किया गया?
जब चोरी गई लकड़ी बरामद तो कहा है चोर ?
इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल पुलिस की कार्यशैली पर उठता है। जब चोरी गई लकड़ी बरामद हो चुकी है, तो आरोपियों तक पहुंचने में देरी क्यों? क्या तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट्स पर पर्याप्त तेजी से काम हो रहा है? या फिर मामला “संवेदनशील” होने के कारण जांच की रफ्तार धीमी है? नाथ बाबा मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जिले की पहचान भी है। ऐसे में मंदिर परिसर से करोड़ों मूल्य की चन्दन लकड़ी की चोरी और चोरों का खुलेआम फरार रहना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है। जिलेवासियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सच में चन्दन चोरी के पीछे किसी सफ़ेदपोश का हाथ है, और अगर है, तो क्या उस चेहरे से नकाब उतरेगा?
फिलहाल बक्सर पुलिस के सामने सबसे बड़ी कसौटी यही है—क्या वह इस पहेली को सुलझाकर भरोसा बहाल कर पाएगी, या फिर चन्दन चोर की कहानी सिस्टम पर लगे सवालों के साथ और गहरी होती चली जाएगी।

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