स्कूल की राह में दरिंदगी, डुमराँव की बेटी की टूट गई दुनिया। दिनदहाड़े गैंगरेप से कांपा बक्सर, सड़क पर उतरी जनता पांच घंटे ठप रहा मोहनिया–आरा मार्ग, गुस्से में उफनाया गांव “बेटियां सुरक्षित नहीं तो विकास किस काम का?” – सवालों के कटघरे में सिस्टम फांसी और स्पीडी ट्रायल की मांग, माले ने छेड़ा जनसंघर्ष !
बक्सर- डुमराँव अनुमण्डल के सोनवर्षा थाना क्षेत्र में शनिवार की सुबह जो हुआ, उसने सिर्फ एक नाबालिग स्कूली छात्रा की जिंदगी नहीं छीनी, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। स्कूल जाने की उम्र, हाथ में किताबें, आंखों में सपने—लेकिन रास्ते में घात लगाए बैठे दरिंदों ने उसके भविष्य को बेरहमी से रौंद दिया। दिनदहाड़े हुए इस सामूहिक दुष्कर्म ने बक्सरवासियों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई है! और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बेटियां कब तक असुरक्षित रहेंगी।
सपनो को उड़ान देने निकली बेटी को दरिंदो ने बनाया शिकार !
बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह करीब नौ बजे पीड़िता रोज की तरह पढ़ाई से जुड़ी गतिविधियों के लिए निकली थी। तभी पहले से घात लगाए तीन आरोपियों ने हथियार के बल पर उसे अगवा कर लिया और एक बथान में ले जाकर सामूहिक रूप से अपनी हैवानियत का शिकार बनाया। कट्टे की नोक पर अंजाम दी गई इस घिनौनी वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। घटना की खबर जैसे ही मीडिया में प्रकाशित हुई आधी आबादी एक बार फिर कांप गई ! महिलाओ की माने तो सपने को उड़ान देने निकली उस मासूम बेटी की आखिर कसूर क्या था? इस घटना से महिलाएं और छात्राएं खुद को बेसहारा और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीण !
बेटी को न्याय दिलाने सड़क पर उतरे ग्रामीण !
इस जघन्य अपराध के खिलाफ रविवार की सुबह लोगों का सब्र का बांध टूट गया। बक्सर की बेटी को न्याय दिलाने के लिए महुआरी गांव के पास मोहनिया–आरा मुख्य मार्ग पर हजारो ग्रामीण सड़क पर उतर आए और आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इस दौरान “बेटी बचाओ सिर्फ नारा नहीं, हकीकत चाहिए” और “दरिंदों को फांसी दो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। करीब पांच घंटे तक सड़क जाम रही, दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। खास बात यह रही कि आम यात्रियों ने भी इसे महज जाम नहीं, बल्कि एक पिता, एक मां और एक समाज की पीड़ा मानते हुए बेटी को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन का समर्थन किया।
सभ्य समाज के माथे पर दरिंदो ने लगाया कलंक !
बेटी को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करने सड़क पर उतरे ग्रामीणों की अगुवाई भाकपा (माले) के डुमराँव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने की। उन्होंने कहा कि यह घटना सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। “जब स्कूल जाने वाली बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार के विकास और सुशासन के सारे दावे खोखले हैं।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में कोई एक मुख्य आरोपी नहीं है, बल्कि तीनों ने मिलकर इस अमानवीय अपराध को अंजाम दिया है। उन्होंने मांग की कि मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर तीनों दोषियों को कड़ी से कड़ी, उदाहरणात्मक सजा दी जाए, ताकि समाज में सख्त संदेश जाए और अपराधियों का मनोबल टूटे। वही ग्रामीणों ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए कहा कि पीड़िता व उसके परिवार को सुरक्षा के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।
एसपी से मिले आश्वासन के बाद सड़क पर से हटे ग्रामीण !
शुरुआत में पुलिस-प्रशासन के रवैये से लोगों का गुस्सा और भड़क गया। ग्रामीण पुलिस कप्तान को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। हालात की गंभीरता को देखते हुए एसपी शुभम आर्य आंदोलन स्थल पर पहुंचे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा ग्रामीणों दिलाया। जिसके बाद आक्रोशित लोगों ने सड़क खाली की।
आक्रोशित लोगों ने वर्तमान विधायक को खदेड़ा !
वही जाम में फंसे वाहन चालक ने बताया ने बताया कि बर्तमान विधायक जी आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुँचकर जाम हटाने का श्रेय लेने पहुंचे थे ! तभी लोग और उग्र हो गए और वर्तमान विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए खदेड़ना शुरू कर दिया! गुस्साई भीड़ की मिजाज को देखकर विधायक ने मौके से कन्नी कटाकर भाग निकले ! जिससे जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए है! वही आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भाकपा (माले) ने साफ ऐलान किया है कि जब तक पीड़िता को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक यह जनसंघर्ष जारी रहेगा। यह घटना सिर्फ एक गांव या एक परिवार की नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अगर अब भी महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाला समय और भयावह हो सकता है।
गौरतलब है कि डुमराँव में दिनदहाड़े हुई इस सामूहिक दुष्कर्म की घटना से आधी आबादी एक बार फिर सहम गई है। अब देखना यह है कि क्या कानून की सख्ती और प्रशासन की तत्परता लोगों के टूटते भरोसे को फिर से जगा पाएगी, या यह दर्द एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगा।




0 Comments