बक्सर–पटना फोरलेन पर जाम का ब्रेक! टोलप्लाजा से ट्रकों की नियंत्रित एंट्री, एसपी का मास्टर प्लान लागू यूपी प्रशासन से समन्वय, गंगा ब्रिज की सुरक्षा पर फोकस

बक्सर–पटना फोरलेन पर जाम का ब्रेक! टोलप्लाजा से ट्रकों की नियंत्रित एंट्री, एसपी का मास्टर प्लान लागू यूपी प्रशासन से समन्वय, गंगा ब्रिज की सुरक्षा पर फोकस एक महीने में 15 मौतों के बाद प्रशासन हरकत में जुर्माना नहीं, सिस्टम सुधार से मिलेगी स्थायी राहत !

बक्सर। बक्सर–पटना फोरलेन अब आम लोगों के लिए सुविधा नहीं बल्कि आफत का फोरलेन बन चुका है। बीते एक महीने में इस मार्ग पर महाजाम, दुर्घटनाओं और अव्यवस्थित ट्रैफिक के कारण करीब 14–15 लोगों की जान जा चुकी है। टोलप्लाजा से लेकर बक्सर गोलम्बर तक लगने वाला जाम न सिर्फ यात्रियों का समय छीन रहा है, बल्कि एम्बुलेंस, स्कूल बस और दैनिक यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए बक्सर पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने खुद मोर्चा संभालते हुए एक ठोस और व्यावहारिक “मास्टर प्लान” की घोषणा की है।

एक साथ कई लेन में प्रवेश करती भारी वाहनों से लग रहा है महाजाम !

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी ने स्पष्ट किया कि जाम का मूल कारण टोलप्लाजा से अनियंत्रित तरीके से छोड़े जा रहे भारी वाहन—खासतौर पर बालू लदे ट्रक—हैं। इन ट्रकों के एक साथ कई लेन में प्रवेश करने से यूपी बॉर्डर तक लंबी कतार लग जाती है, जिसका सीधा असर गंगा ब्रिज की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर पड़ता है। एसपी ने बताया कि एक साल पहले इसी तरह का नियंत्रित प्रयोग किया गया था, जो कारगर साबित हुआ था। उसी मॉडल को अब और सख्ती के साथ लागू किया जाएगा।

टोलप्लाजा से ही होगा नियंत्रण

नए प्लान के तहत टोलप्लाजा से उतने ही ट्रकों को बक्सर की ओर जाने की अनुमति मिलेगी, जितने ट्रक आसानी से सिंगल लेन के माध्यम से यूपी में प्रवेश कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि जेनरल लेन पर आम वाहनों की आवाजाही बाधित न हो और जाम का दबाव एक साथ न बढ़े। इससे ट्रैफिक का फ्लो संतुलित रहेगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

यूपी प्रशासन से समन्वय पर जोर

एसपी ने बताया कि जिलाधिकारी, बक्सर के साथ बैठक के बाद जल्द ही यूपी प्रशासन के साथ भी समन्वय बैठक होगी। पुलिस प्रशासन की मांग है कि यूपी बॉर्डर पर गंगा ब्रिज के ठीक मुहाने पर होने वाली जांच को एक–दो किलोमीटर भीतर शिफ्ट किया जाए। इससे सैकड़ों ट्रकों का दबाव ब्रिज पर नहीं पड़ेगा, ब्रिज सुरक्षित रहेगा और जाम की स्थिति में उल्लेखनीय कमी आएगी। प्रशासन का मानना है कि जांच प्रदेश के भीतर होने से नियंत्रण भी बेहतर होगा और यातायात भी सुचारु चलेगा।

जुर्माना समाधान नहीं, सिस्टम सुधार जरूरी

इस मुद्दे पर मशहूर चिकित्सक सह ट्रैफिक एक्सपर्ट डॉ. एस एन सिंह का कहना है कि केवल जुर्माना बढ़ा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नो-पार्किंग में खड़े ट्रकों पर यदि 5 हजार का जुर्माना भी लगाया जाता है, तो ट्रक चालक उसे लागत में जोड़कर बालू महंगे दाम पर बेच देते हैं। इससे न तो जाम कम होता है और न ही अवैध गतिविधियों पर रोक लगती है। उनके अनुसार, टोलप्लाजा स्तर पर नियंत्रित एंट्री ही सबसे प्रभावी उपाय है, जिससे वसूली के आरोपों पर भी विराम लगेगा।

जनहित में सख्ती, स्थायी राहत की उम्मीद

बक्सर–पटना फोरलेन पर लागू होने वाला यह मास्टर प्लान प्रशासनिक इच्छाशक्ति और अंतरराज्यीय समन्वय की परीक्षा है। यदि योजना जमीन पर उसी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू होती है, तो न सिर्फ महाजाम से राहत मिलेगी, बल्कि जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आम नागरिकों को उम्मीद है कि यह पहल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखे—ताकि फोरलेन फिर से सुविधा बने, आफत नहीं।

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