बक्सर में शिक्षा का ‘धंधा’: सिस्टम और सत्ता की सांठगांठ से स्कूल बेहाल ! बड़का साहेब से लेकर सफेदपोश तक पर सवाल, बच्चों की पढ़ाई बनी मज़ाक! कहीं दो पालियों में स्कूल, तो कहीं 4 कमरों में ठूंसे गए 500 बच्चे! बिना स्कूल गए हाजिरी और वेतन! खुलासों से कांप गया शिक्षा महकमा! जांच कमिटी बनी मज़ाक, हर घोटाला फाइलों में दफन ! जवाब कौन देगा?
बक्सर- बिहार सरकार भले ही कागजों में शिक्षा पर सबसे ज्यादा बजट खर्च करने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी सच्चाई बक्सर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश कर रही है। यहां हालात ऐसे हैं कि सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के लिए कोई बाहरी ताकत नहीं, बल्कि खुद शिक्षा विभाग के “बड़का साहेब” से लेकर “छोटका साहेब” और कुछ सफेदपोश जिम्मेदार माने जा रहे हैं। आरोप है कि पूरे सिस्टम में ऐसा जाल बिछा है, जिसमें सुविधा शुल्क और राजनीतिक संरक्षण के दम पर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को मनमाफिक तरीके से चलाया जा रहा है।
बड़का साहब का तालिवानी आदेश !
जिले में कई स्कूलों की स्थिति यह है कि कहीं दो पालियों में पढ़ाई कराई जा रही है तो कहीं चार कमरों में ही 400 से 500 बच्चों को ठूंस दिया गया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल अब अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के अड्डे बनते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन हालातों पर विभाग के बड़े अधिकारियों की जुबान पर ताला लगा हुआ है।
कौन है बड़का माफिया !
हाल के दिनों में बक्सर की राजनीति में भी शिक्षा विभाग को लेकर जबरदस्त घमासान देखने को मिला। सदर विधायक आनंद मिश्रा ने सांसद सुधाकर सिंह के सहयोगियों अरविंद कुमार सिंह और अजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद भाजपा के जिला प्रवक्ता दीपक पांडेय ने पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता कर सांसद के सहयोगियों को शिक्षा माफिया बताते हुए विभागीय अधिकारियों से करोड़ों की वसूली कराने का आरोप लगा दिया। लेकिन मामला तब और विस्फोटक हो गया जब सांसद सहयोगी ने प्रेस वार्ता कर भाजपा नेताओं और पूरे सिस्टम को ही नंगा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों की उगाही का खेल चल रहा है। यहां तक कि भाजपा प्रवक्ता की पत्नी मधुलिका उपाध्याय के बारे में भी आरोप लगाया गया कि वह बिना स्कूल गए ही हाजिरी लगाकर सरकारी वेतन उठा रही हैं। इन खुलासों के बाद पूरे जिले में मानो तूफानी सन्नाटा पसर गया और शिक्षा विभाग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक को मानो लकवा मार गया !
बड़का साहब के मनमानी या सुविधा शुल्क की कहानी !
इसी बीच सदर प्रखंड के जगदीशपुर पंचायत के कुल्हड़िया गांव स्थित मध्य विद्यालय और उच्च विद्यालय का मामला भी सुर्खियों में है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यहां पढ़ाई की व्यवस्था पूरी तरह चौपट कर दी गई है। पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य और अभिभावकों के विरोध के बावजूद स्कूल को दो पालियों में चलाने का फैसला लागू कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला बच्चों की पढ़ाई के हित में नहीं बल्कि कुछ लोगों की सुविधा के लिए लिया गया है। उनका आरोप है कि “बड़का साहेब” को मैनेज कर स्कूल की व्यवस्था बदली गई ताकि शिक्षक अपनी सहूलियत के हिसाब से कभी भी किसी भी शिफ्ट में आकर औपचारिक पढ़ाई कर निकल जाएं। इस फैसले से नाराज ग्रामीणों ने अब लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि जब प्रबंधन समिति, शिक्षा समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जा रही, तो न्याय के लिए अदालत ही आखिरी रास्ता बचा है।
पांच बर्षो में कई बड़े घोटाले !
पिछले पांच वर्षों में बक्सर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े कई बड़े घोटाले और अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। मीडिया में लगातार खुलासे हुए, जांच कमिटियां भी गठित हुईं, लेकिन नतीजा हमेशा एक ही रहा—जांच रिपोर्ट फाइलों में दफन हो गई और दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब शिक्षा व्यवस्था ही भ्रष्टाचार और सांठगांठ की भेंट चढ़ जाएगी तो देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी? बक्सर की यह तस्वीर सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है जहां सत्ता, सिस्टम और स्वार्थ के गठजोड़ के सामने शिक्षा और बच्चों का भविष्य बेबस नजर आ रहा है।




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