शिक्षा विभाग बना ‘वसूली का विभाग’? बक्सर में रिश्वत का खुला खेल! सत्ता बनाम विपक्ष नहीं, ‘कमीशन बनाम सिस्टम’ की जंग! भाजपा प्रवक्ता पर अवैध वसूली का आरोप, विधायक के संरक्षण की चर्चा ! सांसद सहयोगी के खुलासे से मचा सियासी भूचाल! अब सीसीटीवी कैमरा खोलेगा राज या फिर फाइलों में दफन होगा सच? बक्सर में शिक्षा विभाग बना ‘वसूली का बाजार’, नेताओं के आरोप–प्रत्यारोप से गरमाई सियासत ।
बक्सर- बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हर साल बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करती है। सरकार के कागजों में यह पैसा बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही है। बक्सर में शिक्षा विभाग पर लगे ताजा आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्कूलों और छात्रों के नाम पर आने वाली रकम का असली फायदा किसे मिल रहा है। विद्यार्थियों को या सिस्टम में बैठे कथित ‘वसूली तंत्र’ को।
वसूली का सुपर ठेकेदार कौन !
दरअसल जिले में शिक्षा विभाग को लेकर इन दिनों राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। एक तरफ भाजपा के जिला प्रवक्ता दीपक पांडेय ने प्रेस वार्ता कर राजद सांसद सुधाकर सिंह और उनके सहयोगियों पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को डराकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली कराने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी तरफ सांसद के सहयोगी अरविंद कुमार सिंह ने पलटवार करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा नेताओं पर भी गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी।
वसूली के लिए चल रहा है बर्चस्व का जंग !
दो दिन पहले भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपक पांडेय ने कई दस्तावेज जारी करते हुए दावा किया कि शिक्षा विभाग में पदस्थापना, वेतन भुगतान और अन्य कामों के नाम पर करोड़ों की वसूली कराई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में राजद सांसद के सहयोगी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अधिकारियों पर दबाव बनाकर पैसे वसूल रहे हैं।
सियासी मैदान में उतरे राजद के नेता भाजपा पर किया चौतरफा हमला !
सांसद के सहयोगी ने खोला विभागीय अधिकारियों का राज !
इसी बीच मामला तब और गर्म हो गया जब सांसद के अधिकृत सहयोगी अरविंद कुमार सिंह ने मीडिया के सामने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सीधे गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के इर्द-गिर्द कुछ कथित दलाल शिक्षक सक्रिय हैं, जो वेतन भुगतान, ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रमोशन, मेधा अंक बढ़ाने और रिटायरमेंट के भुगतान तक के लिए मोटी रकम वसूलते हैं।
अधिकारी ही रखे है सरकारी दलाल !
सांसद सहयोगी अरविंद कुमार सिंह के अनुसार इस कथित वसूली का रेट 40 हजार रुपये से शुरू होकर पांच-पांच लाख रुपये तक जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क के सबूत और दस्तावेज भी मौजूद हैं, सांसद सहयोगी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के जिला प्रवक्ता दीपक पांडेय सदर विधायक आनंद मिश्रा के संरक्षण में शिक्षा विभाग में अवैध वसूली कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद जिले की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
कौन है शिक्षा जगत का बड़ा माफिया !
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग का जिला कार्यालय लंबे समय से दलालों का अड्डा बन चुका है। बिना पैसे के फाइल आगे बढ़ना मुश्किल बताया जाता है। कई अधिकारियों के खिलाफ पहले भी थानों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें प्रमोशन मिल जाना सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शिक्षा के नाम पर चल रहे इस कथित वसूली तंत्र की सच्चाई क्या है? क्या जिला प्रशासन और सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों के राजनीतिक शोर-शराबे के बाद फाइलों में दफन हो जाएगा।
फिलहाल बक्सर में शिक्षा विभाग को लेकर उठे इस विवाद ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य सरकार की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सच सामने आएगा या फिर ‘सिस्टम’ एक बार फिर अपने ही सवालों से बच निकलेगा।





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