“घंटों का काम मिनटों में” या मिनटों में सेटिंग का कमाल? घूसखोरी उजागर करने वाला जवान हटाया गया, सवालों में परिवहन महकमा! कोयला ट्रक, 15 हजार और वायरल ऑडियो से मचा बवाल! ‘सिंघम स्टाइल’ सिपाही की तारीफ में उतरे अधिकारी, कार्रवाई पर उठे सवाल वीडियो पर वीडियो लीक, अब विभाग ढूंढ रहा ‘बलि का बकरा’!
बक्सर- जिले का परिवहन चेकपोस्ट इन दिनों नियम-कानून लागू करने से ज्यादा “सेटिंग विज्ञान” का रिसर्च सेंटर बना हुआ है। यहां ट्रकों की जांच कम और कथित “रात का खेल” ज्यादा चर्चा में है। 13 मई की रात करीब तीन बजे कोयला लदी एक ट्रक से 15 हजार रुपये लेकर उसे छोड़ देने का ऑडियो सामने आते ही पूरे विभाग में भूचाल आ गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस व्यक्ति ने इस खेल का खुलासा किया, कार्रवाई उसी पर हो गई।विभाग ने जारी किया पत्र !
जारी पत्र के अनुसार, परिवहन चेकपोस्ट पर तैनात होमगार्ड जवान जितेन्द्र तिवारी ने विभागीय सिपाही सूरज झा पर अवैध वसूली और ट्रक छोड़ने का आरोप लगाते हुए ऑडियो सार्वजनिक किया था। ऑडियो सामने आने के महज 24 घंटे के अंदर जिला परिवहन पदाधिकारी के आदेश पर जितेन्द्र तिवारी को चेकपोस्ट से हटाकर परिवहन कार्यालय बुला लिया गया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई भ्रष्टाचार पर हुई या भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पर?
आरोपी सिपाही का महिमा मंडन कर रहे है डीटीओ साहब !
इधर इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिवहन विभाग के भीतर भी खलबली मची हुई है। विभाग के ही एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर मीडिया को कई ऐसे वीडियो उपलब्ध कराए हैं, जिनमें कथित तौर पर चेकपोस्ट पर वसूली का खेल चलता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सिर्फ एक ट्रक या एक रात तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन सिपाही पर आरोप लगे हैं, उनकी तारीफ खुद जिला परिवहन पदाधिकारी राज कुमार प्रसाद खुलकर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “सूरज झा विभाग के सबसे होशियार सिपाही हैं। वे घंटों का काम मिनटों में कर देते हैं। बाहर सड़क पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।” अधिकारी के इस बयान के बाद जिले में लोग अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा कौन सा जादुई काम है, जो घंटों से मिनटों में हो जाता है? कहीं यह वही “फास्ट ट्रैक व्यवस्था” तो नहीं जिसमें ट्रक भी मिनटों में पास हो जाते हैं?इस खेल का पुराना खिलाड़ी है सिंघम !
विभागीय सूत्र बताते हैं कि परिवहन कार्यालय से जारी पत्र में खुद यह उल्लेख है कि 11 मई और 13 मई को ट्रक “भगा दिए गए”। यानी मामला नया नहीं, बल्कि पुराना खेल है जो अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगा है। सवाल यह भी है कि अगर ट्रक पहले भी छोड़े गए थे तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर मामला गंभीर था तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय खुलासा करने वाले जवान को क्यों हटाया गया? बक्सर में अब यह चर्चा आम हो गई है कि परिवहन चेकपोस्ट पर नियमों से ज्यादा “रेट लिस्ट” काम करती है। रात के अंधेरे में ट्रकों का वजन कम नहीं होता, लेकिन कथित तौर पर नोटों का बोझ जरूर हल्का हो जाता है। वायरल ऑडियो और वीडियो ने विभागीय कार्यशैली की ऐसी तस्वीर पेश की है जिसमें ईमानदारी किनारे खड़ी दिखाई दे रही है और सिस्टम “मैनेजमेंट मॉडल” पर दौड़ता नजर आ रहा है।
फिलहाल पूरे मामले में विभाग के बड़े अधिकारी खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि बढ़ते दबाव के बीच अब किसी छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर मामले को शांत करने की तैयारी चल रही है। लेकिन सवाल अब भी वही है — आखिर बक्सर परिवहन चेकपोस्ट पर चल क्या रहा है? और अगर सबकुछ नियम के अनुसार है तो फिर ऑडियो, वीडियो और आनन-फानन में हुई कार्रवाई किस कहानी की तरफ इशारा कर रही है?




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